पुणे वारियर्स और
डेक्क्न चार्जर्स का सफर खत्म सुहेल अब्बास
इंडियन प्रीमियर लीग-5 अब अपने खत्म होेने के कगार पर खड़ी है, मगर कई
टीमों का फैसला हो गया है कि वह आगे बढ़ेगी या नहीं। आईपीएल-5 में सबसे
पहले बाहर होने वाली टीमें थी पुणे वारियर्स और डेक्कन चार्जर्स। सहारा
गु्रप की टीम पुणे वारियर्स की कप्तानी इस बार सौरभ गांगुली ने की थी
जबकि डेक्कन चार्जर्स के कप्तान श्रीलंका के संगकारा थे। यह दोनो ही
कप्तान अपनी टीमों को कामयाबी दिलाने में नाकाम रहे। पुणे और डेक्कन की
टीमें आईपीएल में बहुत बुरी तरह नाकाम रही और लीग खत्म होेने से तकरीबन
पन्दह दिन पहले ही यह तय हो गया था कि यह दोनों टीमें टूर्नामेंट से
बाहर हो चुकी हैं। अब सौरभ की कप्तानी और बल्लेबाजी में लगा जंग साफ
नजर आ रहा है। उन्हें चाहिए कि वह हर तरह के क्रिकेट से रिटायरमेट लें
ले।
पुणे वारियर्स टीम पहली बार आईपीएल-4 में शामिल हुई थी। सहारा गु्रप की
यह टीम टूर्नामेंट की महंगी तरीन टीमों में से एक थी। पिछले साल हुई
आईपीएल-4 में इसके कप्तान युवराज सिंह थे। तब भी यह टीम कुछ नहीं कर
पाई थी हालांकि इसने अच्छे खेल का मुजाहिरा किया था। इस बार युवराज
सिंह अपने कैंसर का कामयाब इलाज कराने के बाद चूंकि आराम कर रहे थे
इसलिए टीम का कमान भारत के साबिक कप्तान और सहारा ग्रुप के डायरेक्टरों
में से एक, पुणे टीम के मेटोर रहे सौरभ गांगुली को सौंप दी गई, मगर पूरे
टूर्नामेंट सौरभ की कप्तानी और बल्ला दोनों नाकाम रहा। भारत की क्रिकेट
टीम कही जाने फौज का सबसे कामयाब सिपहसालार (कप्तान) रहे सौरभ गांगुली
आईपीएल में बुरी तरह नाकाम नजर आए। सौरभ से कई गुना बेहतर कप्तानी और
बल्लेबाजी का मुजाहिरा तो उनके साथी रहे राजस्थान रायल्स टीम के कप्तान
रहाुल द्रविड कर रहे हैं। पुणे टीम की कप्तानी करने के बाद सौरभ ने अपने
उन चाहने वालों को भी बेहद मायूस किया जो सौरभ के रिटायरमेंट को उनके
साथ हुई ज्यादती समझते थे। उन सभ्ीा लोगों ने सौरभ की कप्तानी और
बल्लेबाजी देखने के बाद कहा कि ‘‘चलो अच्छा हुआ कि दादा (सौरभ) को वक्त
से टीम से बाहर कर दिया गया।’’ पुणे की टीम के हालांकि अभी कई मैच बाकी
हैं। मजमून लिखे जाने तक पुणे वारियर्स ने पन्द्रह मैच खेले थे जिसमें
से ग्यारह मैच वह हारी थी महज चार मैच जीतने में उसे कामयाबी मिली थी।
इस तरह उसके पास कुल आठ प्वाइंट थे। अब पुणे वारियर्स आगे तो नहीं बढ़
सकती मगर आगे चल रही टीमों को हराकर उनका खेल जरूर बिगाड़ सकती है।
कुछ इसी तरह की सूरतेहाल से दो चार है डेक्कन चार्जर्स की टीम। डेक्कन
चार्जर्स की टीम भी टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है मगर प्लेआफ में जाने
वाली किसी भी टीम को हराकर उसे टूर्नामेंट से बाहर कर सकती है। अगर यह
कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि पुणे और डेक्कन चार्जर्स की टीमें वह
पत्थर बन चुकी है कि जिस टीम पर गिर पड़ी उसे डुबा देंगी। डेक्कन
चार्जर्स की टीम शुरू से आईपीएल का हिस्सा है। पहली बार जब यह टीम
आईपीएल में उतरी थी तो इसमें शामिल खिलाडि़यों को देखकर लगता था कि यही
टीम टूर्नामेंट जीतेंगी, क्योंकि दुनिया की तकरीबन हर क्रिकेट टीम का
हार्ड हिटर इसमें शामिल था। मगर पहली आईपीएल 2008 में सारी तोंपे ठंडी
हो गई और खिताब कमजोर समझे जाने वाली राजस्थान रायल्स ने जीता था। इसके
अगल साल आईपीएल-2 (2009) में डेक्कन चार्जर्स ने आईपीएल का खिताब जीता,
उसके बाद से तीसरी, चैथी और पांचवी आईपीएल में डेक्कन की टीम बुरी तरह
नाकाम रही है। आईपीएल-5 में डेक्कन चार्जर्स की खराब हालत का पता इसी
से चलता है कि टीम ने मजमून लिखे जाने तक चैदह मैच खेले थे जिसमें से
महज दो मैच वह जीत सकी और ग्यारह मैच हार गई। एक मैच ड्रा रहा था लिहाजा
उसके चैदह मैचों में पांच प्वाइंट हैं।
टीम इंडिया से बाहर होते ही लगा कि सौरभ का सारा जादू खत्म हो गया।
हालांकि फौरन ही शाहरूख खान ने उन्हें अपनी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स
का कप्तान भी बना दिया था मगर तब पहली आईपीएल में सौरभ ने इतनी उम्दा
कप्तानी की थी कि कोलाकाता नाइट राइडर्स नीचे से फस्र्ट आई थी। अब वह
पुणे के कप्तान बने तो पुणे नीचे से दूसरे नम्बर पर है। यानि सौरभ जिस
टीम के भी कप्तान बने उसका बेडा गर्क हो गया। डेक्कन चार्जर्स भले ही
टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है मगर उसके लिए तो यही फख्र की बात है कि
वह आईपीएल-2 जीत चुकी है। इन टीमों के मालिकान ने कमाई कितनी की इसका
हिसाब-किताब तो बाद में होगा मगर मैदान पर यह टीमें बुरी तरह नाकाम रही
हैं।
विदेशी खिलाड़ी लगाएगा पर्पल कैप
आरेंज कैप के लिए दिलचस्प मुकाबला एम.मेराज
आईपीएल-5 में गुजरते हुए वक्त के साथ बहुत सी चीजों की तस्वीर साफ होती
जा रही है। लेकिन टूर्नामेंट में सबसे ज्यदा विकेट कौन खिलाड़ी लेगा और
सबसे ज्यादा रन कौन बल्लेबाज बनाएगा। इस बारे में कुछ भी वसूक से
नहींकहा जा सकता। आईपीएल में शुरू से यह है कि जो खिलाड़ी टूर्नामेंट
में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला होगा वह पर्पल कैप लगाएगा और सबसे
ज्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी आरेंज कैप। फिलहाल दिल्ली के एम.मोर्कल
पर्पल कैप लगाए नजर आते हैं। मगर आरेंज कैप के लिए बहुत दिलचस्प मुकाबला
चल रहा है। आजिक्य रहाणे और सेहवाग के सरों से होती हुई आरेंज कैप इस
वक्त बंगलौर के खिलाड़ी क्रिस गेल के सर पर है। मगर वह उसे कब तक सर पर
बरकरार रख पाएंगे यही असल सवाल है।
इस वक्त गंेदबाजी के मामले मे जो पोजीशन है। दिल्ली डेयरडेविल्स के
गेंदबाज एम.मोर्कल इक्कीस विकेट लेकर पहले मकाम पर चल रहे हैं और पर्पल
कैप पर फिलहाल उन्हीं का कब्जा है। उनके बाद श्रीलंका के तेज गंेदबाज
और मुंबई इंडियंस की रीढ कहे जाने वाले मलिंगा हैं जिनके बीस विकेट हैं
तीसरे नम्बर पर वेस्टइंडीज के स्पिनर सुनील नारायण सत्रह विकेट लेकर
हंैं। सुनील केकेआर के खिलाड़ी हैं जबकि पन्द्रह विकेट लेकर भारत के
पियूष चावला जो पंजाब के खिलाड़ी हैं सुनील नारायण के पीछे खड़े हैं।
अभी तक मोर्कल और मलिंगा के बीच पर्पल कैप के लिए जबरदस्त मुकाबला चल
रहा है। सुनील और पियूष का उन तक आना एक मुश्किल काम है। इसलिए यह तो
कहा ही जा सकता है कि इस बार पर्पल कैप फिर किसी विदेशी खिलाड़ी के सर
पर ही होगी। पहली आईपीएल में पाकिस्तान के तेज गेंदबाज सुहेल तनवीर ने
पर्पल कैप जीती थी। मलिंगा भी इस कैप को जीत चुके हैं और एक बार फिर उसे
जीतने की कोशिश में हैं। लेकिन कोई आखिरी फैसला फाइनल के वक्त ही होगा।
टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी आरेंज कैप पहने नजर
आता है। शुरू में आठ-दस मैचों तक यह कैप राजस्थान रायल्स के खिलाड़ी
आजिक्य रहाणे के सर पर रही। इसके बाद तूफानी रफ्तार से वीरेन्द्र
सेहवाग आए और आरेज कैप पर अपना कब्जा जमा लिया अभी सेहवाग ठीक से कैप
पहन भी नहीं पाए थे कि रायल चैलेंजर बंगलौर के खिलाड़ी और तूफानी
बल्लेबाज क्रिस गेल गेंदबाजों का कत्लेआम करते हुए आगे बढ़े और आरेंज
कैप अपने सर पर पहन ली। इस खेल में आजिक्य रहाणे फिर कैप हासिल करने की
कोशिश में आगे बढ़े तो उनके पीछे-पीछे डेक्कन चार्जर्स के शिखर द्दवन
भी थे। उन्हीं के साथी कैमरून व्हाइट भी सेहवाग को पीछे छोड़ते हुए आगे
आए। लेकिन मौजूदा सूरतेहाल में गेल के अलावा आजिक्य रहाणे और सेहवाग ही
इस कैप के मजबूत दावेदार नजर आते हैं। हालांकि सेहवाग का दावा रहाणे से
ज्यादा मजबूत है।
मजमून लिखे जाने तक रायल चैलेंजर बंगलौर में क्रिस गेल पांच सौ बहत्तर
बनाकर पहले नम्बर पर थे। दूसरे नम्बर पर राजस्थान रायल्स के आजिक्य
रहाणे पांच सौ इक्तालीस रनो के साथ हैं। हैदराबाद के शिखर द्दवन पांच
सौ अढ़तीस रनों के साथ तीसरे नम्बर पर है। हैदराबाद के ही कैमरून
व्हाइट चार सौ सत्ततर रन बनाकर चैथे नम्बर पर हैं और चार सौ बहत्तर रनों
के साथ सेहवाग पंाचवे नम्बर पर है। इनमें चूूंकि डेक्कन चार्जर्स
टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है लिहाजा उसके खिलाड़ी लीग मैचों तक ही
अपने स्कोर को बढ़ा सकते हैं। कुछ इसी कशमकश में रहाणे फंसे हैं। अगर
राजस्थान रायल्स की टीम प्लेआफ में पहुंचती तब तो रहाणे का दावा मजबूत
होगा वर्ना उनका भी सफर खत्म। क्रिस गेल की टीम भी भंवर में फंसी नजर आ
रही है। अब गेल अगर लीग मैचों में ही इतने रन बना ले कि सेहवाग वहां तक
नहीं पहुंच सके तभी वह आरेंज कैप बचा सकते हैं। दिल्ली का प्लेआफ में
पहुंचना यकीनी है। अगर सेहवाग का दो चार मैचों में बल्ला चल गया तो
आरेंज कैप सेहवाग के कब्जें में होगी। फिलहाल तो सेहवाग गेल से सौ रन
पीछे हैं और अगर गेल लीग मैचों में सौ रन और बना लेते हैं तब तो आरेंज
कैप भी विदेशी खिलाड़ी के सर पर ही सजी नजर आएगी। फिलहाल आरेंज कैप के
लिए बहुत दिलचस्प मुकाबला है। गेल की एक खराब और रहाणे की एक अच्छी
इनिंग आरेंज कैप की मौजूदा जगह बदल सकती है।
ओलम्पिक से पहले ओम प्रकाश का रिकार्ड मुकेश मिश्रा
ओलम्पिक के खेल शुरू होेने मंे तकरीबन सत्तर दिन रह गए हैं।
हिन्दुस्तान के वह तमाम खिलाड़ी जो लंदन ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर
चुके हैं अपनी अपनी तैयारियों में लगे हैं। इनकी कोशिश है कि ओलम्पिक
के पहले हर टूर्नामेंट में अच्छा खेल दिखाकर अपनी तैयारियों को पुख्ता
किया जाए। पिछले दिनों लंदन ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर चुके ओएनजीसी
के थ्रोअर ओम प्रकाश ने हंगरी में बेहतरीन मुजाहिरा करते हुए शाट पुट
में बारह साल पुराना नेशनल रिकार्ड तोड़कर एक नया रिकार्ड बनाया।
तकरीबन बारह बरस कब्ल दो हजार में जब शक्ति सिंह ने 20ण्42 मीटर गोला
फेंका था उस वकत किसी को यकीन नहीं था कि कोई इससे भी ज्यादा दूर लोहे
का गोला फेंक सकता है। लेकिन पिछली बारह मई को हंगरी में सीडी का कूपा
मीट में ओम प्रकाश सिंह ने तीन मर्तबा रिकार्ड तोड़ मुजाहिरा किया।
उन्होंनें अपनी छठी कोशिश में 20ण्69 मीटर दूर गोला फेंककर एक नया
रिकार्ड बना दिया। ओम प्रकाश हंगरी के हाई परफारमेंस सेंटर में लंदन
ओलम्पिक की तैयारियों में मसरूफ है। अपने इस रिकार्ड तोड़ मुजाहिरे के
साथ उन्हांेने ओलम्पिक का ए ग्रेड क्वालीफिकेशन मार्क भी हासिल किया।
उन्होंने कहा कि वह ओलम्पिक में इस मुजाहिरे से आगे जाना चाहते हैं।
शाट पुट या लोहे का गोला फेंक मुकाबले में सबसे पहले 1954 में 14ण्36
मीटर तक गोला फेंक कर एक रिकार्ड बनाया था। जिसे 1961 में दिलशाद ईरानी
ने 15ण्53 गोल फेंक कर तोड़ा फिर 1963 में दिलशाद ईरानी ने 16ण्02 मीटर
गोला फेंक कर एक रिकार्ड बनाया। 1970 में जोगिन्दर सिंह ने सत्रह मीटर
दूर गोला फेंका था। 1974 में बहादुर सिंह ने 18ण्44 मीटर दूर गोला फेंका
था। 1995 में शक्ति ंिसह ने 19ण्08 मीटर दूर गोला फेंका फिर दो हजार
में 20ण्42 मीटर दूर गोला फेंककर एक ऐसा रिकार्ड बनाया था कि पिछले
बारह साल से उसे कोई नहीं तोड़ सका था। अब 20ण्69 मीटर दूर गोला फेंककर
ओम प्रकाश ने एक नया रिकार्ड बनाया है। अब
पुणे वारियर्स और डेक्क्न चार्जर्स का सफर खत्म
सुहेल अब्बास
इंडियन प्रीमियर लीग-5 अब अपने खत्म होेने के कगार पर खड़ी है, मगर कई टीमों का फैसला हो गया है कि वह आगे बढ़ेगी या नहीं। आईपीएल-5 में सबसे पहले बाहर होने वाली टीमें थी पुणे वारियर्स और डेक्कन चार्जर्स। सहारा गु्रप की टीम पुणे वारियर्स की कप्तानी इस बार सौरभ गांगुली ने की थी जबकि डेक्कन चार्जर्स के कप्तान श्रीलंका के संगकारा थे। यह दोनो ही कप्तान अपनी टीमों को कामयाबी दिलाने में नाकाम रहे। पुणे और डेक्कन की टीमें आईपीएल में बहुत बुरी तरह नाकाम रही और लीग खत्म होेने से तकरीबन पन्दह दिन पहले ही यह तय हो गया था कि यह दोनों टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी हैं। अब सौरभ की कप्तानी और बल्लेबाजी में लगा जंग साफ नजर आ रहा है। उन्हें चाहिए कि वह हर तरह के क्रिकेट से रिटायरमेट लें ले।
पुणे वारियर्स टीम पहली बार आईपीएल-4 में शामिल हुई थी। सहारा गु्रप की यह टीम टूर्नामेंट की महंगी तरीन टीमों में से एक थी। पिछले साल हुई आईपीएल-4 में इसके कप्तान युवराज सिंह थे। तब भी यह टीम कुछ नहीं कर पाई थी हालांकि इसने अच्छे खेल का मुजाहिरा किया था। इस बार युवराज सिंह अपने कैंसर का कामयाब इलाज कराने के बाद चूंकि आराम कर रहे थे इसलिए टीम का कमान भारत के साबिक कप्तान और सहारा ग्रुप के डायरेक्टरों में से एक, पुणे टीम के मेटोर रहे सौरभ गांगुली को सौंप दी गई, मगर पूरे टूर्नामेंट सौरभ की कप्तानी और बल्ला दोनों नाकाम रहा। भारत की क्रिकेट टीम कही जाने फौज का सबसे कामयाब सिपहसालार (कप्तान) रहे सौरभ गांगुली आईपीएल में बुरी तरह नाकाम नजर आए। सौरभ से कई गुना बेहतर कप्तानी और बल्लेबाजी का मुजाहिरा तो उनके साथी रहे राजस्थान रायल्स टीम के कप्तान रहाुल द्रविड कर रहे हैं। पुणे टीम की कप्तानी करने के बाद सौरभ ने अपने उन चाहने वालों को भी बेहद मायूस किया जो सौरभ के रिटायरमेंट को उनके साथ हुई ज्यादती समझते थे। उन सभ्ीा लोगों ने सौरभ की कप्तानी और बल्लेबाजी देखने के बाद कहा कि ‘‘चलो अच्छा हुआ कि दादा (सौरभ) को वक्त से टीम से बाहर कर दिया गया।’’ पुणे की टीम के हालांकि अभी कई मैच बाकी हैं। मजमून लिखे जाने तक पुणे वारियर्स ने पन्द्रह मैच खेले थे जिसमें से ग्यारह मैच वह हारी थी महज चार मैच जीतने में उसे कामयाबी मिली थी। इस तरह उसके पास कुल आठ प्वाइंट थे। अब पुणे वारियर्स आगे तो नहीं बढ़ सकती मगर आगे चल रही टीमों को हराकर उनका खेल जरूर बिगाड़ सकती है।
कुछ इसी तरह की सूरतेहाल से दो चार है डेक्कन चार्जर्स की टीम। डेक्कन चार्जर्स की टीम भी टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है मगर प्लेआफ में जाने वाली किसी भी टीम को हराकर उसे टूर्नामेंट से बाहर कर सकती है। अगर यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि पुणे और डेक्कन चार्जर्स की टीमें वह पत्थर बन चुकी है कि जिस टीम पर गिर पड़ी उसे डुबा देंगी। डेक्कन चार्जर्स की टीम शुरू से आईपीएल का हिस्सा है। पहली बार जब यह टीम आईपीएल में उतरी थी तो इसमें शामिल खिलाडि़यों को देखकर लगता था कि यही टीम टूर्नामेंट जीतेंगी, क्योंकि दुनिया की तकरीबन हर क्रिकेट टीम का हार्ड हिटर इसमें शामिल था। मगर पहली आईपीएल 2008 में सारी तोंपे ठंडी हो गई और खिताब कमजोर समझे जाने वाली राजस्थान रायल्स ने जीता था। इसके अगल साल आईपीएल-2 (2009) में डेक्कन चार्जर्स ने आईपीएल का खिताब जीता, उसके बाद से तीसरी, चैथी और पांचवी आईपीएल में डेक्कन की टीम बुरी तरह नाकाम रही है। आईपीएल-5 में डेक्कन चार्जर्स की खराब हालत का पता इसी से चलता है कि टीम ने मजमून लिखे जाने तक चैदह मैच खेले थे जिसमें से महज दो मैच वह जीत सकी और ग्यारह मैच हार गई। एक मैच ड्रा रहा था लिहाजा उसके चैदह मैचों में पांच प्वाइंट हैं।
टीम इंडिया से बाहर होते ही लगा कि सौरभ का सारा जादू खत्म हो गया। हालांकि फौरन ही शाहरूख खान ने उन्हें अपनी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स का कप्तान भी बना दिया था मगर तब पहली आईपीएल में सौरभ ने इतनी उम्दा कप्तानी की थी कि कोलाकाता नाइट राइडर्स नीचे से फस्र्ट आई थी। अब वह पुणे के कप्तान बने तो पुणे नीचे से दूसरे नम्बर पर है। यानि सौरभ जिस टीम के भी कप्तान बने उसका बेडा गर्क हो गया। डेक्कन चार्जर्स भले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है मगर उसके लिए तो यही फख्र की बात है कि वह आईपीएल-2 जीत चुकी है। इन टीमों के मालिकान ने कमाई कितनी की इसका हिसाब-किताब तो बाद में होगा मगर मैदान पर यह टीमें बुरी तरह नाकाम रही हैं।
विदेशी खिलाड़ी लगाएगा पर्पल कैप
आरेंज कैप के लिए दिलचस्प मुकाबला
एम.मेराज
आईपीएल-5 में गुजरते हुए वक्त के साथ बहुत सी चीजों की तस्वीर साफ होती जा रही है। लेकिन टूर्नामेंट में सबसे ज्यदा विकेट कौन खिलाड़ी लेगा और सबसे ज्यादा रन कौन बल्लेबाज बनाएगा। इस बारे में कुछ भी वसूक से नहींकहा जा सकता। आईपीएल में शुरू से यह है कि जो खिलाड़ी टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला होगा वह पर्पल कैप लगाएगा और सबसे ज्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी आरेंज कैप। फिलहाल दिल्ली के एम.मोर्कल पर्पल कैप लगाए नजर आते हैं। मगर आरेंज कैप के लिए बहुत दिलचस्प मुकाबला चल रहा है। आजिक्य रहाणे और सेहवाग के सरों से होती हुई आरेंज कैप इस वक्त बंगलौर के खिलाड़ी क्रिस गेल के सर पर है। मगर वह उसे कब तक सर पर बरकरार रख पाएंगे यही असल सवाल है।
इस वक्त गंेदबाजी के मामले मे जो पोजीशन है। दिल्ली डेयरडेविल्स के गेंदबाज एम.मोर्कल इक्कीस विकेट लेकर पहले मकाम पर चल रहे हैं और पर्पल कैप पर फिलहाल उन्हीं का कब्जा है। उनके बाद श्रीलंका के तेज गंेदबाज और मुंबई इंडियंस की रीढ कहे जाने वाले मलिंगा हैं जिनके बीस विकेट हैं तीसरे नम्बर पर वेस्टइंडीज के स्पिनर सुनील नारायण सत्रह विकेट लेकर हंैं। सुनील केकेआर के खिलाड़ी हैं जबकि पन्द्रह विकेट लेकर भारत के पियूष चावला जो पंजाब के खिलाड़ी हैं सुनील नारायण के पीछे खड़े हैं। अभी तक मोर्कल और मलिंगा के बीच पर्पल कैप के लिए जबरदस्त मुकाबला चल रहा है। सुनील और पियूष का उन तक आना एक मुश्किल काम है। इसलिए यह तो कहा ही जा सकता है कि इस बार पर्पल कैप फिर किसी विदेशी खिलाड़ी के सर पर ही होगी। पहली आईपीएल में पाकिस्तान के तेज गेंदबाज सुहेल तनवीर ने पर्पल कैप जीती थी। मलिंगा भी इस कैप को जीत चुके हैं और एक बार फिर उसे जीतने की कोशिश में हैं। लेकिन कोई आखिरी फैसला फाइनल के वक्त ही होगा।
टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी आरेंज कैप पहने नजर आता है। शुरू में आठ-दस मैचों तक यह कैप राजस्थान रायल्स के खिलाड़ी आजिक्य रहाणे के सर पर रही। इसके बाद तूफानी रफ्तार से वीरेन्द्र सेहवाग आए और आरेज कैप पर अपना कब्जा जमा लिया अभी सेहवाग ठीक से कैप पहन भी नहीं पाए थे कि रायल चैलेंजर बंगलौर के खिलाड़ी और तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल गेंदबाजों का कत्लेआम करते हुए आगे बढ़े और आरेंज कैप अपने सर पर पहन ली। इस खेल में आजिक्य रहाणे फिर कैप हासिल करने की कोशिश में आगे बढ़े तो उनके पीछे-पीछे डेक्कन चार्जर्स के शिखर द्दवन भी थे। उन्हीं के साथी कैमरून व्हाइट भी सेहवाग को पीछे छोड़ते हुए आगे आए। लेकिन मौजूदा सूरतेहाल में गेल के अलावा आजिक्य रहाणे और सेहवाग ही इस कैप के मजबूत दावेदार नजर आते हैं। हालांकि सेहवाग का दावा रहाणे से ज्यादा मजबूत है।
मजमून लिखे जाने तक रायल चैलेंजर बंगलौर में क्रिस गेल पांच सौ बहत्तर बनाकर पहले नम्बर पर थे। दूसरे नम्बर पर राजस्थान रायल्स के आजिक्य रहाणे पांच सौ इक्तालीस रनो के साथ हैं। हैदराबाद के शिखर द्दवन पांच सौ अढ़तीस रनों के साथ तीसरे नम्बर पर है। हैदराबाद के ही कैमरून व्हाइट चार सौ सत्ततर रन बनाकर चैथे नम्बर पर हैं और चार सौ बहत्तर रनों के साथ सेहवाग पंाचवे नम्बर पर है। इनमें चूूंकि डेक्कन चार्जर्स टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है लिहाजा उसके खिलाड़ी लीग मैचों तक ही अपने स्कोर को बढ़ा सकते हैं। कुछ इसी कशमकश में रहाणे फंसे हैं। अगर राजस्थान रायल्स की टीम प्लेआफ में पहुंचती तब तो रहाणे का दावा मजबूत होगा वर्ना उनका भी सफर खत्म। क्रिस गेल की टीम भी भंवर में फंसी नजर आ रही है। अब गेल अगर लीग मैचों में ही इतने रन बना ले कि सेहवाग वहां तक नहीं पहुंच सके तभी वह आरेंज कैप बचा सकते हैं। दिल्ली का प्लेआफ में पहुंचना यकीनी है। अगर सेहवाग का दो चार मैचों में बल्ला चल गया तो आरेंज कैप सेहवाग के कब्जें में होगी। फिलहाल तो सेहवाग गेल से सौ रन पीछे हैं और अगर गेल लीग मैचों में सौ रन और बना लेते हैं तब तो आरेंज कैप भी विदेशी खिलाड़ी के सर पर ही सजी नजर आएगी। फिलहाल आरेंज कैप के लिए बहुत दिलचस्प मुकाबला है। गेल की एक खराब और रहाणे की एक अच्छी इनिंग आरेंज कैप की मौजूदा जगह बदल सकती है।
ओलम्पिक से पहले ओम प्रकाश का रिकार्ड
मुकेश मिश्रा
ओलम्पिक के खेल शुरू होेने मंे तकरीबन सत्तर दिन रह गए हैं। हिन्दुस्तान के वह तमाम खिलाड़ी जो लंदन ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं अपनी अपनी तैयारियों में लगे हैं। इनकी कोशिश है कि ओलम्पिक के पहले हर टूर्नामेंट में अच्छा खेल दिखाकर अपनी तैयारियों को पुख्ता किया जाए। पिछले दिनों लंदन ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर चुके ओएनजीसी के थ्रोअर ओम प्रकाश ने हंगरी में बेहतरीन मुजाहिरा करते हुए शाट पुट में बारह साल पुराना नेशनल रिकार्ड तोड़कर एक नया रिकार्ड बनाया।
तकरीबन बारह बरस कब्ल दो हजार में जब शक्ति सिंह ने 20ण्42 मीटर गोला फेंका था उस वकत किसी को यकीन नहीं था कि कोई इससे भी ज्यादा दूर लोहे का गोला फेंक सकता है। लेकिन पिछली बारह मई को हंगरी में सीडी का कूपा मीट में ओम प्रकाश सिंह ने तीन मर्तबा रिकार्ड तोड़ मुजाहिरा किया। उन्होंनें अपनी छठी कोशिश में 20ण्69 मीटर दूर गोला फेंककर एक नया रिकार्ड बना दिया। ओम प्रकाश हंगरी के हाई परफारमेंस सेंटर में लंदन ओलम्पिक की तैयारियों में मसरूफ है। अपने इस रिकार्ड तोड़ मुजाहिरे के साथ उन्हांेने ओलम्पिक का ए ग्रेड क्वालीफिकेशन मार्क भी हासिल किया। उन्होंने कहा कि वह ओलम्पिक में इस मुजाहिरे से आगे जाना चाहते हैं।
शाट पुट या लोहे का गोला फेंक मुकाबले में सबसे पहले 1954 में 14ण्36 मीटर तक गोला फेंक कर एक रिकार्ड बनाया था। जिसे 1961 में दिलशाद ईरानी ने 15ण्53 गोल फेंक कर तोड़ा फिर 1963 में दिलशाद ईरानी ने 16ण्02 मीटर गोला फेंक कर एक रिकार्ड बनाया। 1970 में जोगिन्दर सिंह ने सत्रह मीटर दूर गोला फेंका था। 1974 में बहादुर सिंह ने 18ण्44 मीटर दूर गोला फेंका था। 1995 में शक्ति ंिसह ने 19ण्08 मीटर दूर गोला फेंका फिर दो हजार में 20ण्42 मीटर दूर गोला फेंककर एक ऐसा रिकार्ड बनाया था कि पिछले बारह साल से उसे कोई नहीं तोड़ सका था। अब 20ण्69 मीटर दूर गोला फेंककर ओम प्रकाश ने एक नया रिकार्ड बनाया है। अब