बाॅलीवुड का कामयाब फार्मूला
असल जिन्दगी पर फिल्म बनाना
बालीवुड ही नहीं बल्कि हालीवुड में भी अस्ल वाक्ये या किसी शख्सियत
के ऊपर फिल्में बनाने का रिवाज रहा है। ऐसी फिल्मों को बायोपिक
मूवीज के नाम से जाना जाता है। अगर हालीवुड की बात की जाए तो
उन्नीस सौ बयासी में रिचर्ड एटनबरो के डायरेक्शन में बनी फिल्म
गांद्दी महात्मा गांद्दी पर बनाई गई थी। इसी तरह उन्नीस सौ अस्सी
में मार्टिन स्कार्सीज के डायरेक्शन में बाक्सर जेक ला माटा पर
रेजिंग बुल, माइकल निकोलस के डायरेक्शन में उन्नीस सौ तिरासी में
मजदूर लीडर कैरेन सिल्क पर सिल्क वुड, उन्नीस सौ बान्वे में स्पाइक
ली के डायरेक्शन में अमरीकी लीडर पर मैलकम एक्स, उन्नीस सौ तिरान्वे
में स्टीवन स्पीलबर्ग के डायरेक्शन में सनअतकार आस्कर शिंडलर पर
शिंडलर्स लिस्ट, शेखर कपूर के डायरेक्शन में एलिजाबेथ फस्र्ट पर
उन्नीस सौ अट्ठानवे में एलिजाबेथ, दो हजार एक में माइकल मन के
डायरेक्शन में बाक्सर मोहम्मद अली पर अली और दो हजार आठ में स्टीवन
साडरबरो के डायरेक्शन में अमरीकी कानून के मुशीर पर फिल्में बनी
जबकि बालीवुड में उन्नीस सौ बावन में सोहराब मोदी के डायरेक्शन में
झांसी की रानी पर रानी लक्ष्मी बाई, उन्नीस सौ चैवन में सोहराब मोदी
के ही डायरेक्शन में मिर्जा गालिब पर मिर्जा गालिब, उन्नीस सौ
तिरान्वे में केतन मेहता के डायरेक्शन में सरदार पटेल पर सरदार,
उन्नीस सौ चैरान्वे में शेखर कपूर के डायरेक्शन में फूलन देवी पर
बैंडिट क्वीन, दो हजार पांच में श्याम बेनेगल के डायरेक्श्न में
सुभाष चंद्र बोस पर बोस, दो हजार पांच में ही केतन मेहता के
डायरेक्शन में इंकलाबी मंगल पांडेय पर मंगल पांडेय, दो हजार आठ में
केतन मेहता के ही डायरेक्शन में ममुसव्विर राजा रवि वर्मा पर रंग
रसिया, दो हजार ग्यारह में मिलन लूथरिया के डायरेक्शन में सिल्क
स्मिता पर दि डर्टी पिक्चर और इस साल दो हजार बारह में तिग्मांशु
द्दूलिया के डायरेक्शन में पान सिहं तोमर पर पान सिंह तोमर जैसी
फिल्में बन चुकी हैं। इसी कड़ी को अब शाहरूख खान आगे बढ़ाते हुए
हाकी के जादूगर ध्यान चंद बनने जा रहे हैं।
दो हजार बारह और इसके बाद शायद बालीवुड में ऐसी बहुत सी फिल्में
बनने जा रही हैं या बनकर मंजरे आम पर आने का इंतजार कर रही हैं जो
बायोपिक हैं। डायरेक्टर केतन मेहता की फिल्म रंग रसिया करीब दो साल
से बनकर तैयार है। इस फिल्म में रवि वर्मा के रोल में रणदीप हुड्डा
और नंदना सेन है। बायोपिक मूवीज सीरीज में तीन फिल्में गांद्दी
खानदान पर बनने जा रही हैं। डायरेक्टर जग मूंद्दड़ा जो आखिरी सांस
तक कांग्रे्रस सदर सोनिया गांद्दी पर फिल्म बनाने का ख्वाब देखते
रहे लेकिन उनका ख्वाब पूरा नहीं हो सका और वह इस दुनिया से चल बसे।
वह सोनिया गांद्दी के रोल के लिए हालीवुड एक्ट्रेस मोनिका बलूसी को
लेना चाहते थे। राजीव गांद्दी की जिंदगी पर भी एक फिल्म बनने जा रही
है। इसी तरह इंदिरा गांद्दी पर भी फिल्म बनाने की बात गश्त कर रही
है। बर्थ आफ ए नेशन के नाम से बन रही इस फिल्म के डायरेक्टर ब्रूस
बर्स फोर्ड हैं। नेशनल अवार्ड याफ्ता भावना तलवार राजीव गांद्दी पर
फिल्म बनाने की तैयारी कर रही हैं। पिछले दिनों हीरोइन सुष्मिता
सेन के आशिक के तौर पर सुर्खियों में छाए रहने वाले मुदस्सर अजीज
अब मशहूर पंजाबी कवि शिव कुमार बटालवी पर एक फिल्म बनाने जा रहे
हैं। डायरेक्टर अनुराग बसु किशोर कुमार पर एक बायोपिक फिल्म बनाने
का एलान कर चुके हैं। इस फिल्म में रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ होंगी।
बालीवुड में बहुत तेजी और द्दमाकेदार तरीके से अपनी मौजूदगी का
एहसास कराने वाली हीरोइन दिव्या भारती पर भी एक फिल्म बनाने की बात
चल रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इस फिल्म के डायरेक्शन की कमान
विक्रम संद्दू के हाथों में होगी जो इससे पहले फिल्म शहीद भगत सिंह
बना चुके हैं। बालीवुड का एक फिल्म साज संजय दत्त की बीवी मान्यता
दत्त पर भी एक फिल्म बनाना चाहते हैं। बी ग्रेड फिल्मों के मशहूर
डायरेक्टर-प्रोड्यूसर कांति शाह पर भी एक फिल्म बनाने की बात की जा
रही है। जिसका नाम है- यह है मुंबई। इस फिल्म के डायरेक्शन की
जिम्मेदारी स्नेहा तुली के कंद्दे पर होगी। विवेक ओबराय भी दाऊद
इब्राहीम की अस्ल जिंदगी पर फिल्म बनाने का इरादा जाहिर कर चुके
हैं। फिल्म प्रोडक्शन का बोझ अमित चंद्रा उठाएंगे जो विवेक ओबराय
के साथ एक दीगर फिल्म किस्मत, लव पैसा दिल्ली बना रहे हैं। निखिल
द्विवेदी भी अबू सलेम पर बन रही फिल्म में काम करने जा रहे हैं।
गैंगस्टर अबू सलेम के किरदार को लेकर काफी खुश हैं।
हिन्दी फिल्मों में काॅमेडी का
गिरता मेयार
नाजीरन को हंसाने के लिए जिस कलाकार का इस्तेमाल किया जाता था उसकी
पहचान उसकी बातो और हरकतों से होती थी लेकिन अब जो फिल्में आ रही
है उसमें कामेडी के लिए कोई अलग से कलाकार को रखने के बजाए हीरो ही
इस काम को अंजाम देने लगे हैं। ऐसे में कामेडी के मेयार मे कमी आना
लाजिमी है। क्योंकि एक ही कलाकार एक ही फिल्म में कई तरह के रोल को
सही तरीके से अंजाम नहीं दे पाता। जिस फ्रेंच डायरेक्टर की एक
फिल्म को कापी करके कुछ साल पहले एक यादगार और हिट फिल्म ‘भेजा
फ्राई’ आई थी उसी डायरेक्टर की एक और हिट फिल्म की कहानी पर बनी
फिल्म ‘बंबू’ पिछले दिनों आई। फिल्म के सीन कुछ इस तरह से शूट किए
गए कि लोगों के लिए हज्म करना मुश्किल हो गया। दरअस्ल ऐसा मामला
सिर्फ इसी फिल्म के साथ नहीं जुुड़ा है बल्कि बेश्तर फिल्में ऐसी
होती है जो कामेडी को ध्यान में रखकर तो बनाई जाती हैं लेकिन
नाजरीन की कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं।
फिल्म ‘भेजा फ्राई’ से मशहूर हुए डायरेक्टर सागर बेल्लारी ने
तीन-तीन कामेडी फिल्में कच्चा लिंबू, भेजा फ्राई-2 और हम तुम शबाना
दी। इन तीनों ही फिल्मों में कामेडी के नाम पर जो नाजरीन के सामने
रखा गया उससे नाजरीन ने साफ मुंह मोड़ लिया। फिल्म ‘चतुर सिंह टू
स्टार’ में सिवाए हो-हल्ला और बचकानेपन के कुछ नहीं था। गोविंदा को
लेकर जगमोहन मूंद्दड़ा जैसे डायरेक्टर ने ‘नाटी एट 40’ फिल्म बनाई
लेकिन इस फिल्म के हश्र का अंदाजा पहले ही लगाते हुए इसकी रिलीज के
वक्त ही मंूद्दडा ने इससे अपना नाम ही हटा लिया था। तीन थे भाई
जिसमे ओमपुरी, दीपक डोबरियाल और श्रेयस तलपड़े जैसे बेहतरीन कलाकारों
का इस्तेमाल किया गया, को बेहद कच्चेपन के साथ बनाया गया था। इसी
के साथ एक और फिल्म बुढ्ढा मर गया को इसलिए भी याद किया जाता रहेगा
क्योंकि इसमें भी दिग्गज कलाकारों को लिया गया था लेकिन इस फिल्म
में काम करने वाले कलाकारों को इसमें काम करके अपनी गलती का एहसास
हो गया। चांदनी चैक टू चाइना की मिसाल भी हमारे सामने है जो कि एक
बड़े बजट की फिल्म थी। कामेडी फिल्में भी कई तरह की होती हैं। एक
तो ऋषिकेश मुखर्जी वाली कामेडी होती है जिसे बनाना अब हर किसी के
बूते की बात नहीं। क्योंकि इस तरह की फिल्में गैर मंतिकी नहीं हो
सकती। अब फिल्मों में कामेडी के नाम पर जो परोसा जाता है उसमें
फूहड़पन ज्यादा होता है तभी तो ऐसी फिल्मों को नाजरीन नहीं मिल पाते।
फिल्में तभी कामयाब होती हैं जब इनमें कामेडी की खुराक काफी ज्यादा
हो और रफ्तार काफी तेज। सही मायनों में नाजरीन को हंसाने के लिए
कामेडी के मेयार को बुलंद रखना ही होगा।
एक करोड़ का आइटम सांग
ज्यादातर हिन्दी फिल्मों में एक अदद आइटम सांग रखने का अब रिवाज सा
हो गया है। क्योंकि इसी को फिल्म की कामयाबी का पैमाना माना जाने
लगा है। शीला की जवानी, छम्मक छल्लो और अनारकली डिस्को चली जैसे
आइटम नम्बर में करीना कैटरीना और मलाइका के बाद अब राखी सावंत भी
इस मैदान में उतर रही हैं। वह अब मौसीकार सतीश-अजय के आइटम नम्बर
पर अपने हुस्न का जादू चलाएंगी। इस आइटम सांग में वह लट्टू गर्ल बनी
हैं जिसकी फिल्मसाजी पर तकरीबन एक करोड़ रूपए का खर्च आने का अंदाजा
लगाया जा रहा है। बालीवुड की कई फिल्मों में अपनी सुरीली मौसीकी का
जलवा बिखेर चुके सतीश-अजय ने पिछले साल ही हालीवुड की फिल्म राक इन
मीरा में मौसीकी देकर बेशुमार शोहरत हासिल की थी। अब बालीवुड में
लट्टू सांग के जरिए वह जोरदार तरीके से कदम रखने जा रहे हैं।
यूपी के रहने वाले सतीश-अजय की जोड़ी ने अब तक तकरीबन दर्जन भर
बालीवुड की फिल्मों के अलावा मुल्क की नामी-गिरामी म्यूजिक कम्पनियों
के लिए करीब ढाई दर्जन एलबम और भोजपुरी फिल्मों में अपने म्यूजिक
का जादू दिखाया है। इस आइटम नम्बर के अलावा सतीश-अजय ने दो दीगर
आइटम गीत भी कम्पोज किए हैं। बहुत जल्द यह दोनो आइटम गीत सामईन को
सुनने को मिल सकेंगे। लेकिन बहुत जल्द रिलीज होने वाली फिल्म
‘रक्तबीज’ में फिलहाल यह जोड़ी अपने म्यूजिक का लोहा बनवाने जा रही
है।