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May 20-26
गेंहू
की बम्पर पैदावार हुकूमत और किसानों दोनों के लिए बनी मुसीबत
नुमाइंदा मरकज़
नई दिल्ली! इस साल गेंहू की जबरदस्त और बम्पर पैदावार मुल्क भर
के किसानों के साथ-साथ सरकार के लिए भी मुसीबत बन गई है। एक तरफ तो
स्टोरेज के लिए गोदामों की कमी की वजह से किसानों को कम से कम सहारा
कीमत से भी कम कीमत पर गंेहू बेंचना पड़ रहा है। दूसरी तरफ
एक्सपोर्ट के जरिए भी स्टाक कम करना मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
इंटरनेशनल मण्डियों में आस्ट्रेलिया, रूस और यूक्रेन का गेंहू सस्ता
होेने की वजह से हिन्दुस्तानी गेंहू के एक्सपोर्ट की रफ्तार काफी
सुस्त है। सितम्बर से अब तक सिर्फ 7ण्2 लाख टन गेंहू का एक्सपोर्ट
हो सका है। इधर किसानों को मंडियों में गेंहू रखने के लिए जगह नहीं
मिल रही है। सरकारी एजेंसियों के जरिए गेंहू को नहीं उठाए जाने की
वजह से मंडियां गेंहू की बोरियों से भरी पड़ी हैं। इसकी वजह से
किसान मंडियों से बाहर ही अपना गेंहू लिए पड़े हैं। उन्हें
पांच-पांच दिन तक सड़को पर इंतजार करना पड़ रहा है तो कहीं-कहीं
गेंहू खेतों में खुले आसमान तले ही पड़ा हुआ है। जिसकी वजह से
किसानों को एमएसपी (मिनिमम सपोर्ट प्राइज)से भी कम कीमतों पर गेंहू
बेंचना पड़ रहा है। हालांकि मरकजी और रियासती सरकारें अब भी दावा
कर रही हैं कि किसानों को परेशान नहीं होना चाहिए। एमएसपी पर ही
उनका सारा गंेहू खरीदा जाएगा। दरअस्ल अनाज के रिकार्ड पैदाबार के
बाद अब उसका स्टोरेज सरकार के लिए चैलेंज साबित हो रहा है। स्टोरेज
सलाहियत बढ़ाने के लिए मरकजी वजीर वीके थामस ने फूड कारपोरेशन आफ
इंडिया से मजीद गोदाम किराए पर लेने को कहा है। थामस ने कहा कि
हुकूमत के पास इस वक्त अनाज का जखीरा करने की कुल सलाहियत तकरीबन
छः सौ साठ लाख टन की है। इसमें से पचासी फीसद गोदाम भरे हुए हैं।
एफसीआई से एक साल के लिए प्राइवेट गोदाम किराए पर लेने के लिए कहा
गया है। एफसीआई ही एमएसपी पर अनाजों की खरीददारी के लिए सरकार की
नोडल एजेंसी है। मरकजी वजीर थामस ने कहा है कि चावलो केे स्टोरेज
में कोई परेशानी नहीं है लेकिन गेंहू रखना एक चैलेंज बन गया है।
सरकार इस मसले से निपटने के लिए अस्सी लाख टन गेंहू को गरीबी की
रेखा से नीचे रहने वाले खानदानों को देने की तजवीज पर अमल कर रही
है। गेंहू के रिकार्ड पैदावार ने किसानों को परेशानी में डाल दिया
है। कहीं बोरी की किल्लत की वजह से खरीदारी नहीं हो पा रही है तो
कहीं जगह की कमी का बहाना बनाया जा रहा है। कुछ मकामात पर सरकारी
एजेंसियां नमी के नाम पर खरीददारी में आनाकानी कर रहीं हैं। मजबूरी
के सबब किसान आढतियों को एमएसपी से दो सौ रूपए कम में ही अपने गेंहू
बेंच रहे हैं सरकार ने इस साल गेंहू का एमएसपी बारह सौ पचासी रूपए
फी कुंटल तय किया है। वजीर जराअत शरद पवार ने तस्लीम किया है कि
कुछ रियासतों में एमएसपी से कम रेट पर गेंहू बेचने की इत्तेला उन्हें
मिली है। वह इस मामले पर वजारत खुराक के साथ मिलकर जल्दी ही कोई
मुनासिब कदम उठाएंगे। सरकारी एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा मसला
गोदामों का है। बेश्तर गोदाम पिछले साल के गेंहू और चावल से अटे पड़े
हैं और इस साल गेंहू रखने की भी जगह नहीं है। दूसरी तरफ सरकारी
अहलकारांे का कहना है कि तमाम किसान एक साथ अनाज बेचना चाहते हैं
हालांकि उन्हें पहले टोकन लेकर फिर अनाज लाना चाहिए लेकिन वह ऐसा
नहीं कर रहे हैं। एक साथ अनाज लाने से खरीद सेंटरों पर जगह और
बोरियों की कमी हो गई है। जूट की बोरियों की कमी की वजह से कई
मकामात पर सरकार ने प्लास्टिक की बोरियों के लिए टेंडर जारी कर दिए
हैं। किसानों का इल्जाम है कि हुक्काम को पहले से ही जूट को बोरियों
की कमी का अंदाजा था। इसके बावजूद उन्हांेने प्लास्टिक की बोरियों
के लिए टेण्डर जारी करने में जानबूझ कर देर की है। गेंहू के
रिकार्ड पैदावार के बावजूद बहरहाल अस्ल सवाल अपनी जगह बाकी है कि
क्या मंहगाई की मार से बेहाल मुल्क के अवाम को सस्ते में अनाज मिल
सकेगा और इससे भी बड़ा सवाल यह कि दो वक्त की रोटी के मोहताज लाखों
गरीबों को भुकमरी से निजात दिलाने के लिए क्या सरकार कोई ठोस और
अमली कदम उठाएगी या सब कुछ सिर्फ कागजात की खानापूरी तक महदूद रह
जाएगा।
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