‘जम्हूरियत के
मंदिर’ की साख बरकरार रखने का अहद
नुमाइंदा खुसूसी
नई दिल्ली! पार्लियामेंट की साठवीं साल गिराह के मौके पर दोनों
एवानों के खुसूसी इजलास में मेम्बरान पार्लियामेंट का इस बात पर
खासा जोर रहा कि पार्लियामेंट की बरतरी को हर कीमत पर बरकरार रखा
जाएगा और इस बात का भी खूब जिक्र हुआ कि मुल्क में जम्हूरियत के
मजबूत से मजबूतर होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। हालांकि इस मौके
पर लीडरों ने यह भी एतराफ किया कि पार्लियामेंट का जो वकार पहले था
और लोगों के दिलों में मुल्क की सबसे बड़ी पंचायत की जो कद्र व
कीमत हुआ करती थी उसमें कमी आई है क्योंकि पार्लियामेंट का कीमती
वक्त बिलावजह की बहसों, बायकाट, टोकाटाकी और शोर शराबे की नज्र हो
जाता है। जिससे जरूरी काम या तो पेडिंग में पड़े रहते हैं या फिर
इंतेहाई जरूरी मामलों के बिल बगैर बहस के मंजूर किए जाने की रस्म
अदायगी कर दी जाती है। इस सूरतेहाल पर वजीर-ए-आजम से लेकर लीडर आफ
अपोजीशन और स्पीकर तक ने तश्वीश का इजहार किया। पहली लोकसभा के चार
मेम्बरान रिसांग हिसिंग और रेशम लाल जांगडे, कुंदाला सुब्रमणयम और
के.मोहन राव की ताजीम और तकरीम की गई। सबसे खास बात यह है कि
रिसांग घिसिंग पहली लोकसभा के मेम्बर थे तो आज वह राज्य सभा में
नुमाइंदगी कर रहे हैं। सदर-ए-जम्हूरिया प्रतिभा सिंह पाटिल ने इसी
शाम को पार्लियामेंट के मरकजी हाल में हुए रंगारंगा प्रोग्राम को
खिताब करते हुए हिन्दुस्तान को दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत बताया
और कहा कि इस मजबूत जम्हूरियत को बरकरार रखना एक बड़ा चैलेंज है।
मुख्तलिफ ख्यालात को एहतराम देने से ही जम्हूरियत मजबूत होगी।
वजीर-ए-आजम डाक्टर मनमोहन सिंह ने खुसूसी इजलास को खिताब करते हुए
यहां यह कहा कि दुनिया भर मंे हिन्दुस्तान के बढ़ते कद की एक वजह
हिन्दुस्तानियों का अटूट यकीन है कि जम्हूरी तरीकों से ही समाजी और
एक्तेसादी हालात को बेहतर बनाया जा सकता है और यह हिन्दुस्तान का
काबिले फख्र कारनामा है जबकि स्पीकर मीरा कुमार ने कहा कि लीडरों
के लिए वोटरो की उम्मीदों पर खरा उतरना बेहद जरूरी है। तारीख इसी
बुनियाद पर उनकी कद्र व कीमत का अंदाजा लगाएगी। लोकसभा में अपोजीशन
पार्टी की लीडर सुषमा स्वराज ने कहा कि जम्हूरी इदारों में आई
खामियों को उन पर हमला करके नहीं बल्कि मिल बैठकर और ज्यादा जम्हूरी
अमल अपनाकर दूर किया जा सकता है।
तेरह मई पार्लियामेंट की साठवीं सालगिराह का दिन था। 1952 की इसी
तारीख को पार्लियामेंट का पहला जलसा हुआ था उस वक्त सदर-ए-जम्हूरिया
डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने इजलास को खिताब करते हुए कहा था कि यह
पहला मौका है जब सारे मुल्क का इंतजाम व इंसराम एक जम्हूरी निजामे
हुकूमत के तहत आया है। मुल्क की तारीख में यह गैर मामूली लम्हा है।
इस जम्हूरिया और पार्लियामेंट का कयाम आजादी के बाद ही अमल में आ
सकता है। लेकिन हमारे जम्हूरिया की नीव हमारे आईन में है। इसलिए इस
आजादी का तहफ्फुज हर हिन्दुस्तानी का अव्वलीन फरीजा है। हमें यह
याद रखना चाहिए कि हमारे तमाम तरक्कियाती मंसूबे हमारी आजादी के
तहफ्फुज पर मुंहसिर है। हमारी इस ख्वाहिश को और तकवियत मिलती है कि
हमारे हर शहरी का मेयार जिंदगी बेहतर हो। जबकि इस मौके पर
वजीर-ए-आजम पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने खिताब में कहा था ‘‘
पार्लियामानी निजामे हुकूमत में न सिर्फ मजबूत अपोजीशन की जरूरत
होती है न सिर्फ अपने ख्यालात को पुरअसर अंदाज से जाहिर करना होता
है बल्कि हुक्मरां और अपोजीशन के बीच तआवुन की बुनियाद निहायत जरूरी
होती है। किसी एक मामले में ही तआवुन काफी नहीं बल्कि पार्लियामेंट
के काम को आगे बढ़ाने की बुनियाद आपसी तआवुन ही है और जहां तक हम
ऐसा करने में कामयाब होंगे वहंा तक हमें पार्लियामानी निजाम की ठोस
नीव रखने में भी कामयाबी मिलेगी। पार्लियामेंट का मेम्बर किसी
मखसूस खित्ते या इलाके का मेम्बर नहीं होता बल्कि पूरे मुल्क का
मेम्बर होता है।’’ इस मौके पर पंडित नेहरू ने यह भी कहा था कि ‘‘
आइंदा हमें आराम नहीं करना है चैन से नहीं बैठना है बल्कि मुसलसल
कोशिश करना है ताकि हम जो वादा बार-बार दोहराते रहे हैं और आज भी
दोहराते है उसे पूरा कर सकेें।’’ उन्होंने कहा था कि हिन्दुस्तान
की खिदमत का मतलब है कि हिन्दुस्तान के करोड़ो परेशान लोगों की
खिदमत करना। इसका मतलब है गरीबी और जिहालत को मिटाना, मौके की
नाबराबरी को मिटाना। उन्होंने इस मौके पर इंतेहाई जोरदार तरीके से
यह कहा था कि ‘‘ हमारी पीढ़ी के सबसे अजीम शख्स की यही ख्वाहिश रही
है कि हर आंख से आंसू मिट जाए शायद यह हमारे लिए मुमकिन नही है।
मगर जब तक लोगों की आंखों में आंसू है तब तक हमारा काम खत्म ना होगा।’’
लोकसभा के पहले स्पीकर गणेश वासुदेव माओलिंकर ने अपने खिताब में कहा
था कि ‘‘सच्ची जम्हूरियत के लिए सिर्फ आईन की शिको (अध्यादेशों)या
एवान की कार्रवाई को चलाने के लिए जाब्तों और कानून तक ही महदूद नहीं
रहना चाहिए बल्कि एवान के मेम्बरों ने जम्हूरियत के सच्चे जज्बे को
फरोग देना चाहिए।’’
कुछ इसी किस्म के ख्यालात का इजहार साठवीं सालगिराह के मौके पर भी
पार्लियामेंट के मोअज्जिज मेम्बरों की तरफ से किया गया और यह दिखाने
की कोशिश की गई पार्लियामेंट के तकद्दुस और इसके वकार इसकी साख को
बरकरार रखने की भरपूर कोशिश की जाएगी ताकि जम्हूरियत और ज्यादा
मजबूत हो। इसके लिए कोशिश की जाए कि पार्लियामेंट का वक्त बायकाट
और शोर हंगामें में बर्बाद न हो मगर अगले ही दिन पार्लियामेंट की
मामूल की मीटिंग में यह सामने आ गया कि एक दिन पहले मेम्बरान
पार्लियामेंट ने जो वादे किए थे, जो कसमें खाई थी वह सब खुसूसी
इजलास तक के लिए ही थीं। पार्लियामेंट के मौजूदा इजलास की कार्रवाई
मेें अपोजीशन पार्टियों का वही रवैया दिखाई दिया जिसे खत्म करने की
शदीद जरूरत बताई गई थी।
पार्लियामेंट की साठवीं सालगिराह क्यों मनाई गई इसकी कोई खास वजह
नहीं बताई गई सिर्फ इतना कहा गया कि आज से साठ बरस पहले तेरह मई को
पार्लियामेंट का पहला इजलास शुरू हुआ था। हालांकि इस तरह के मौको
को याद करने की जो रिवायत चलन में है उसमें पच्चीस बरस पर सिल्वर
जुबली, पचास बरस पर गोल्डन जुबली मनाई जाती है। लोगों के जेहनों
में अभी वह पांच रोजा खुसूसी इजलास महफूज है जब आजादी की पचासवीं
साल गिराह उन्नीस सौ सत्ताननवे में मनाई गई थी। पार्लियामेंट की
गोल्डन जुबली का मौका 2002 में आया था। लेकिन उस वक्त की सरकार ने
इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया। शायद पार्लियामेंट की गोल्डन जुबली ना
मनाने की वजह यह होगी 2002 की सत्ताइस फरवरी से गुजरात जलना शुरू
हुआ था और यह सिलसिला कई महीनों तक जारी रहा था। अगर खुसूसी इजलास
बुलाय जाता तो एनडीए सरकार कटघरे में खड़ा होना पड़ता तो बहुत
चालाकी से इस मौके को ऐसे जाने दिया गया।
जिस जम्हूरियत और सेक्युलरिज्म पर हम नाज करते हैं गुजरात में
नरेन्द्र मोदी के इशारों पर नाचने वाली सरकार के जिम्मेदारों ने इसी
जम्हूरियत और सेक्युलरिज्म की आला कद्रों की धज्जियां उड़ाने में
कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
एवान में साठ बरसों की तकमील पर मुनअकिद खुसूसी इजलास में राज्य सभा
में मेम्बरान पार्लियामेंट ने कौम को दरपेश बड़े चैलेंजेज में गरीबी
का खात्मा और दहशतगर्दी और शोरिश पसंदगी से मुकाबले को बड़ा चैलेंज
करार देते हुए अहद किया और कहा कि अवाम ने पार्लियामेंट से जो
उम्मीदें जोड़ कर रखी हैं उनपर खरा उतरने की पूरी कोशिश की। राज्य
सभा में खुसूसी इजलास के आगाज में वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह ने अपनी
तकरीर के दौरान एवान के वकार को बहाल करने की जरूरत पर जोर देते
हुए कहा कि राज्य सभा के अब तक के इफ्तेखार के जज्बे का इजहार किया।
जबकि अपोजीशन के लीडर अरूण जेटली ने कहा कि पिछले साठ बरसों मंें
हमने जम्हूरियत को बरकरार रखा है बल्कि एक ताकत बनकर उभरे हैं। साठ
साल की मुद्दत किसी कौम की जिंदगी में समुन्दर की एक बूंद की
मानिंद होती है लेकिन हमारे आईनसाजों ने जो सिम्त तय की हम उस
दौरान इस तरफ मजबूती से बड़े हैं। हमने मुल्क की यकजहती और सालमियत
को बरकरार रखने का अस्ल मकसद हासिल किया है। राज्य सभा के साबिक
डिप्टी चेयरमैन के.रहमान खान ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि
मेम्बरान एवान की कार्रवाइयों के दौरान जाब्तों पर अमल नहीं करते
और रूकावटें डालते हैं। इसका नतीजा यह है कि किसी इजलास का तकरीबन
तीस फीसद वक्त शोर व गुल और खलल अंदाजी में बरबाद हो जाता है। इस
मौके पर इस पर भी फिक्र मंदी का इजहार किया गया कि अब पार्लियामेंट
की इतनी नशिस्तें नहीं होती जैसे पहले हुआ करती थी। इस मामले में
उन्नीस सौ बावन की पार्लियामेंट में सबसे ज्यादा रिकार्ड छः सौ
सतहत्तर नशिस्तें हुई थीं। इसके बाद आज तक ऐसा मौका दोबारा नहीं आया।
इस बात पर तश्वीश जाहिर की गई कि पहले पार्लियामेंट में जैसी संजीदा
कारामद और फआल बहसें होती थी और उसमें एवान की ही नहीं पूरे मुल्क
की दिलचस्पी होती थी मगर अब हालात यह है कि कई बार सीनियर लीडरों
को भी सुनने को मेम्बरान तैयार नहीं दिखाई देते।
बुनकरों के मसायल पर पार्लियामेंट
में हंगामा
नुमाइंदा मरकज़
नई दिल्ली! उत्तर प्रदेश के बुनकरों की बदहाली को लेकर सोलह मई
को राज्य सभा में खूब हंगामा हुआ। हंगामें की वजह से हाउस को कई
बार मुल्तवी करने की भी नौबत आई। वक्फा सवाल के दौरान बीएसपी के
सालिम अंसारी ने बुनकरों के बारे में इजाफी सवाल करते हुए कहा कि
बनारस, मऊ और गाजीपुर में रहने वाले बुनकर बहुत मेहनत से बनारसी
साड़ी तैयार करते हैं लेकिन खरीदारी का मुनासिब निजाम न होने की
वजह से उन्हें अपना माल कम कीमत पर बेचना पड़ता है। उन्होंने पूछा
कि क्या मरकजी सरकार उनका माल सीधे खरीदने पर गौर करेगी। इस पर
टेक्सटाइल वजीर आनंद शर्मा ने कहा कि यह सच है कि बुनकर मसायल का
सामना कर रहे हैं और यह बात सरकार और एवान के लिए बाइसे फिक्र है।
इस पर बीएसपी के ही ब्रजेश पाठक ने कहा कि वजीर को हकीकत पेश करना
चाहिए, चुनावी तकरीर नहीं करनी चाहिए। सालिम अंसारी समाजवादी पार्टी
के नरेश अग्रवाल और अस्ल सवाल पूछने वाली बीजेपी की कुसुम राय ने
पाठक की बात की हिमायत की।
कुसुमराय ने इल्जाम लगाया कि बुनकरों के मसले को लेकर सरकार संजीदा
नहीं है और सिर्फ सियासी बयानबाजी से काम ले रही है। चेयरमैन हामिद
अंसारी ने मेम्बरान से पुरसुकून रहने की अपील की। आनंद शर्मा ने कहा
कि अस्ल सवाल हैण्डलूम इलाके और बुनकरो के लिए मंसूबो के बारे में
है और इसका उन्होंने सीधा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले
पन्द्रह साल से सरकार बुनकरों सेे माल नहीं खरीदती बल्कि कम शरह
सूद पर कर्ज और दीगर मदद उन्हें मुख्तलिफ मंसूबों के जरिए मुहैया
कराई जाती है। वजीर के जवाब से मेम्बर मुत्मइन नहीं हुए और हंगामा
जारी रहा। इसी बीच नरेश अग्रवाल बीएसपी के मुनकाद अली के साथ
चेयरमैन की तरफ बढ़ने लगे। हंगामा थमते न देख उन्होंने इजलास दस
मिनट के लिए मुल्तवी कर दिया।
एवान का इजलास दोबारा शुरू होनेे पर चेयरमैन ने कहा कि पहले सवाल
में उठाया गया मौजूअ, अस्ल सवाल और इजाफी सवालात के जवाब से हल नहीं
हो पाया इसलिए बेहतर होगा कि इस पर आधे घंटे की बहस कराई जाए और
इसके लिए मेम्बर नोटिस दें। इसी बीच नरेश अग्रवाल समाजवादी पार्टी
मेम्बरान के साथ चेयरमैन के सामने आ गए। उनकी ही पार्टी की जया
बच्चन अपने मकाम पर खड़ी होकर अपनी पार्टी के मेम्बरान की हिमायत
जताती रही। जेडीयू के अली अनवर अंसारी भी सामने आ गए। हंगामे की
वजह से स्पीकर ने इजलास मुल्तवी कर दिया।
चिदम्बरम ने दिलाया भोजपुरी जबान की तरक्की का भरोसा
नुमाइंदा मरकज़
नई दिल्ली! भोजपुरी जबान को आईन की आठवी शिड्यूल में शामिल करने
के जोरदार मतालबा का जवाब देते हुए होम मिनिस्टर पी.चिदम्बरम ने
सत्रह मई को लोकसभा में शायद पहली बार अंग्रेजी के अलावा किसी जबान
में बोलते हुए भोजपुरी में कहा ‘‘ हम रउका सबके भावना समझतनी’’
(मैं आप सब के एहसासात समझता हूं) चिदम्बरम ने कहा कि वह इस मामले
पर ध्यान देंगे और मानसून सेशन में सरकार इस इश्यू पर ठोस कदम
उठाएगी। हालांकि यह वाजेह नहीं हो सका कि उन्होंने किसी के जरिए
लिखी गई भोजपुरी पढ़ी या यह खुद उन्होंने जुमला पढ़ा। बहरहाल लोकसभा
स्पीकर मीरा कुमार ने चिदम्बरम की इस कोशिश की तारीफ करते हुए कहा
मुझे इस बात की खुशी है कि होम मिनिस्टर जिन्हें मैने सदन में
हिन्दी बोलते हुए भी नहीं सुना वह आज भोजपुरी में बोले।
इससे पहले लोकसभा में राष्ट्रीय जनता दल के लीडर और वैशाली के
मेम्बर पार्लियामेंट रघुवंश प्रसाद सिंह और महाराजगंज से मेम्बर
पार्लियामेंट उमा शंकर सिहं ने भोजपुरी के मसले को उठाते हुए कहा
कि यह जबान सरकरी सतह पर नजर अंदाज हो रही है। रघुवंश प्रसाद सिंह
ने कहा कि पचास हजार स्क्वायर मील में बोली जाने वाली और अदबी
तहरीर के बावजूद इसे आठवी शिड्यूल में शामिल नहीं किया गया है। उमा
शंकर सिंह ने कहा कि मुल्क की कई यूनिवर्सिटियों में जबान के तौर
पर पढ़ाई जा रही भोजपुरी के साथ नाइंसाफी हो रही है। इस मतालबे के
बाद आए चिदम्बरम के बयान से गैर मुतमइन भोजपुरी बोलने वाले कुछ
मेम्बरान पार्लियामेंट ने थोड़ी देर तक पार्लियामेंट में हंगामा
किया लेकिन लोकसभा स्पीकर की खामोश रहने की अपील के बाद वह अपनी
अपनी सीट पर चले गए।
मोदी को गडकरी का चेहरा पसन्द नहीं
जे़बा ख़ान
नई दिल्ली! वक्त से पहले लोकसभा एलक्शन के चर्चा के बीच मुंबई
में होेने वाली बीजेपी की वर्किंग कमेटी की मीटिंग में पार्टी के
अहम लीडर और गुजरात के वजीर-ए-आला नरेन्द्र मोदी शायद ही मौजूद
हों। रस्मी तौर पर जहां गुजरात में असम्बली एलक्शन एक वजह है वही
बतौर कौमी सदर नितिन गडकरी की मुद्दत बढ़ाने की कवायद भी मोदी को
रास नहीं आ रही है। गडकरी और मोदी के बीच कई महीने से बोलचाल नहीं
है। गडकरी ने भी कुछ अर्सा पहले एक इंटरव्यू में यह कुबूल किया था।
पार्टी लीडरों का कहना है कि कौमी वर्किंग कमेटी की अगली मीटिंग
गडकरी के असर वाले मकाम मुंबई में होने के साथ ही मोदी की अदम
मौजूदगी का इमकान है।
बीजेपी यूं तो चैबीस पच्चीस मई को होने वाली कौमी वर्किंग कमेटी की
मीटिंग में हर मेम्बर के मौजूद होेने का दावा कर रही है लेकिन कहते
हैं कि मोदी इस बार भी नजर न आएं। वाजेह हो कि मोदी पिछली वर्किंग
कमेटी की मीटिंग जो दिल्ली में हुई थी, से भी दूर रहे थे जबकि
उत्तर प्रदेश एलक्शन मुहिम में प्रोग्राम के एलान के बावजूद आखिर
तक उनका इंतजार ही होता रहा था। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश
एलक्शन के बाद तंजीम में संजय जोशी का रूतबा बढ़ने से वह नाराज थे।
गडकरी की सदारत को लेकरभी वह खुश नहीं है। कुछ दिन पहले पार्टी कोर
गु्रप की मीटिंग में गडकरी की मुद्दत बढ़ाने के लिए तजवीज लाने पर
बात हुई थी। मुंबई में यह तजवीज लाई जानी है। ऐसे मे जराए का कहना
है कि मोदी फिर पार्टी के इजलास से दूर ही रहेंगे। जराए के मुताबिक
संजय जोशी की पार्टी में वापसी को लेकर वह अब भी नाराज है और गडकरी
से उनकी बातचीत तक बन्द है। नरेन्द्र मोदी में आरएसएस मुस्तकबिल का
लीडर देखता है। उन्हें वजीर-ए-आजम के ओहदे का उम्मीदवार कहा जाता
है। इसी के साथ आरएसएस नितिन गडकरी को बीजेपी के सदर के तौर पर एक
और टर्म दिला रहा है। लेकिन इन दो ख्वाहिशों में टकराव है और इसे
भी आरएसएस की एक सोची समझी सियासत का हिस्सा माना जा रहा है। मुंबई
में होेने जा रही पार्टी की कौमी वर्किंग कमेटी की मीटिंग इंतिहाई
अहम है क्योंकि इसमें नितिन गडकरी को बतौर सदर मुसलसल दूसरा मौका
देने की तजवीज पास होगी। साल के आखिर में कौमी कौंसिल मौजूदा आईन
में तरमीम की तजवीज पास करेगी जो किसी को सदर का मुसलसल दो
मुद्दतकार देने से रेाकता है। हिमाचल प्रदेश, गुजरात और मध्य
प्रदेश में जल्द एलक्शन होने हैं जहां बीजेपी मजबूत मानी जाती है।
बीजेपी के सीनियर लीडर अरूण जेटली इंकशाफ कर चुके हैं कि संजय जोशी
को पार्टी में वापस लेने के फैसले से मोदी नाराज है। उन्होंने
उत्तर प्रदेश की एलक्शन मुहिम में भी हिस्सा नहीं लिया जिसकी
जिम्मेदारी नितिन गडकरी ने संजय जोशी को सौंपी थी।
दरअस्ल मोदी और संजय जोशी के बीच पुराना झगड़ा है। जोशी पार्टी के
कौमी जनरल सेक्रेटरी थे लेकिन एक मुतनाजा सीडी वाक्ए के बाद उन्हें
पार्टी से बाहर कर दिया गया था। मोदी खेमे ने इशारा दिया है कि जब
तक संजय जोशी के मामले में ठोस फैसला नहीं होता, मोदी का रूख नर्म
नहीं होगा। यही वजह है कि पार्टी के पास इसका साफ जवाब नहीं है। कि
मोदी वर्किंग कमेटी की मीटिंग में शिरकत करेंगे या नहीं। जब मोदी
पांच मई को दिल्ली में थे तब उन्होंने इस सवाल को टाल दिया था कि
वह मुंबई कांफ्रेंस में हिस्सा लेंगे या नहीं। हालांकि बीजेपी
कयादत का एक तबका मोदी को कांफ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए मनाने
में लगा है। उम्मीद जाहिर की जा रही है कि मुंबई में होेने वाली
वर्किंग कमेटी की मीटिंग में पार्टी आईन में तब्दीली की तजवीज को
कुबूल कर लिया जाएगा। इसके साथ ही गडकरी की दोबारा ताजपोशी की जाएगी।
गडकरी की तीन साल की मुद्दत दिसम्बर के आखिर में मुकम्मल हो रही
है। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की गडकरी को हिमायत हासिल है। आने
वाले लोकसभा और असम्बली एलक्शन गडकरी की कयादत में हो इसलिए उन्हें
दोबारा सदर बनाने की कोशिश जारी है। अगर वह फिर से सदर चुने जाते
हैं तो पार्टी की तारीख में लाल कृष्ण आडवानी के बाद वह दूसरे लीडर
होंगे। इसके अलावा मीटिंग में एलक्शन को लेकर तफसीली बात होगी।
एनडीए की अहम तरीन एत्तेहादी पार्टी होेने की वजह से एत्तेहादी
पार्टियों के साथ हम आहंगी बनाने की तजवीज पर ठोस फैसला लिया जाएगा।
मुल्क भर की सियासी सरगर्मियों का जायजा लेने के बाद मरकजी सरकार
को घेरने की हिकमते अमली बनाई जाएगी। मुल्क भर के पांच सौ से ज्यादा
ओहदेदार इजलास में हिस्सा लेंगे। जिनमें लाल कृष्ण आडवानी, अरूण
जेटली, सुषमा स्वराज, गोपीनाथ मुंडे, बीजेपी हुक्मरानी वाली रियासतों
के चीफ मिनिस्टर्स नायब चीफ मिनिस्टर्स और अपोजीशन पार्टी के लीडर
शामिल हैं।
जया बच्चन को फिर गुस्सा आया
नुमाइंदा मरकज़
नई दिल्ली! समाजवादी पार्टी की राज्य सभा मेम्बर और अदाकारा जया
बच्चन को एक बार फिर गुस्सा आया। इस बार उन्हें इस बात पर गुस्सा
नहीं आया है कि सरकार के किसी वजीर ने उनके सवाल का सही तरीके से
जवाब नहीं दिया। इसलिए भी नहीं कि उनके मुंहबोले और बड़बोले देवर
रहे अमर सिंह से राज्य सभा में मौजूद रहने के बावजूद उनकी बातचीत
नहीं होती। इसलिए भी नहीं कि पार्लियामेंट में आते जाते वक्त उनके
रास्ते में किसी ने रूकावट डाली हो। उन्हें गुस्सा इसलिए आया कि
उनके शौहर अमिताभ बच्चन की पुराने जमाने में महबूबा कही जाने वाली
मशहूर अदाकारा ‘‘रेखा’’ जब राज्य सभा में हलफ लेने आई तो राज्य सभा
टीवी के कैमरा परसन ने उनके चेहरे पर कैमरा क्यों फोकस किया और
बार-बार उन्हें परेशान सा क्यों दिखाया। वह इतना नाराज हो गई कि
राज्य सभा के चेयरमैन हामिद अंसारी से शिकायत करके राज्य सभा के
टीवी के सीईओ केा तलब करा दिया और उनके पूछगछ के साथ उनका जवाब तलब
भी कराया।
जया बच्चन को मुलायम सिंह यादव ने अपनी पार्टी से राज्य सभा भेजा
है जबकि रेखा को सदर जम्हूरिया (राष्ट्रपति) ने नामजद किया है।
नामजद राज्य सभा मेम्बर की हैसियत कुछ ज्यादा ही होती है। फिल्म
इंडस्ट्री से इससे पहले नरगिस, लता मंगेशकर और हेमा मालिनी भी
राज्य सभा में सदर जम्हूरिया की नामजद मेम्बर रह चुकी हैं। आजकल
जावेद अख्तर और श्याम बेनेगल भी राज्य सभा में नामजद मेेम्बर है।
रेखा जब हलफ लेने पहुंची तो राज्य सभा के तकरीबन तमाम मेम्बरान ने
मेजे थपथपा कर रेखा का जोरदार खैरमकदम किया। उनका जबरदस्त खैरमकदम
जया बच्चन को कुछ अच्छा नहीं लगा। इससे पहले जब जया बच्चन ने राज्य
सभा मेम्बर की हैसियत से हलफ लिया था तो उनके लिए मेम्बरान ने इतनी
गर्मजोशी का मजाहिरा नहीं किया था। शायद इसलिए भी कि जया बच्चन
दूसरी बार राज्य सभा की मेम्बर बनी हैं। अगर फिल्मी जुबान में बात
की जाए तो इतनी ज्यादा उम्र हो जाने के बावजूद रेखा अपनी पुरानी
दोस्त या रकीब जया बच्चन के मुकाबले कहीं ज्यादा ग्लैमरस दिखती
हैं। जब वह राज्य सभा में आईं तो उनका मेकअप और सलीके से पहनी हुई
साड़ी तारीफ का मरकज बनी हुई थीं। दूसरी तरफ जया बच्चन पर कैमरा
फोकस कर रहा था उनके बाल आगे से काफी सफेद चेहरे पर कोई दिलकशी नहीं
फिर वह इंतेहाई मगरूर अंदाज में बैठी थी। अगर रिवायत की बात की जाए
तो कायदे के एतबार से जया बच्चन को आगे बढ़ कर रेखा का खैरमकदम करना
चाहिए था, खैरमकदम तो जया के चेहरे से ऐसा लग रहा था जैसे रेखा के
राज्य सभा में पहुंचना उन्हें बहुत ज्यादा नागवार गुजराहो। इससे
कब्ल उन्होंने अपनी सीट भी तब्दील करा ली थी क्योंकि अगर वह अपनी
एलाटेड सीट पर बैठती तो रेखा ठीक उनके पीछे रहती क्योंकि रेखा की
सीट उनकी सीट के पीछे थी।