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  Jadeed Markaz
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‘‘मौजूदा सूबाई हुकूमत और हमारी तवक्कोआत’’ के मौजू पर हुआ सेमिनार
काजिम हुसैन
खैराबाद (सीतापुर)-
कस्बे के मोहल्ला कजियारे में गुजिश्ता रोज मुस्लिम यूनाइटेड आर्गेनाइजेशन बैनर के जेरे एहतेमाम व उनवान ‘‘ मौजूदा सूबाई हुकूमत और हमारी तवक्कोआत’’ एक सेमीनार का इनअकाद किया गया। जिसकी सदारत साबिक एडवोकेट जनरल उत्तर प्रदेश हुकूमत व अकलियती कमीशन उत्तर प्रदेश के साबिक चेयरमैन एसएमए काजमी ने की और मेहमाने खुसूसी के तौर पर उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश के साबिक चेयरमैन मौलाना यासीन अली उसमानी ने शिरकत की साथ ही अलीगढ़ मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के मेम्बर शकील समदानी, उत्तर प्रदेश लोहिया वाहिनी के रियासती सदर आनन्द भदौरिया, सीनियर एडवोकेट विलायत अहमद खां मौजूद थे।
प्रोफेसर शकील समदानी ने खिताब करते हुए कहा कि इस सेमीनार ने यह पैगाम दे दिया कि खैराबाद के लोग बेदार है और अगर कोई इन्हें धोका देना चाहेगा तो वह खुद धोका खाएगा लेकिन शर्त यह है कि हम इसी तरह हमेशा बेदार रहें और तालीमयाफ्ता बन जाएं क्योंकि जब हमारे पास इल्म होगा तो हमें हुकूमत की स्कीमों के बारे में मालूम होता रहेगा, बल्कि मश्विरा देते हुए कहा कि अपने मसायल को अपने रहनुमा को पेश करें और दो माह के बाद फिर उनसे मिलकर पूछें कि फलां काम में कहां तक कामयाबी मिली। इस तरह से वह लीडर अपने काम के लिए फिक्र मंद रहेगा और काम भी पूरा होगा।
सेमीनार की सदारत कर रहे एसएमए काजमी ने कहा कि समाजवादी पार्टी मुसलमानों की पार्टी है और उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव ही मुसलमानों के लीडर हैं। क्योंकि मुलायम सिंह यादव ने हमेशा मुसलमानों की हिमायत की चाहे 1989 में बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए कारसेवकों पर गोली चलवाना हो, 1994 में मोअल्लिम-ए-उर्दू को बीटीसी, अदीब, अदीब माहिर, अदीब कामिल को हाईस्कूल, इंटर और बीए के मसावी मानकर नौकरी देना हो या अरबी फारसी बोर्ड उत्तर प्रदेश की डिग्री मुंशी मोलवी को हाईस्कूल, आलिम को इंटर के बराबर का दर्जा देना हो, उर्दू ट्रांसलेटर की तकर्रूरी करना हो सभी कुछ मुसलमानों के मफाद में काम किया जबकि बीएसपी की लीडर मायावती पर हमला करते हुए कहा कि बदउनवानी का राज कायम किया जिसकी वजह से ही मुझे एक साल में ही अकलियती कमीशन का चेयरमैन के ओहदे से हटाया गया।
मेहमाने खुसूसी मौलाना यासीन अली उसमानी ने तो सिर्फ मुलायम सिंह यादव और समाजवादी के कसीदे ही पढ़े जबकि आनन्द भदौरिया ने खिताब के दौरान कहा कि जो आज मसायल सामने आए हैं उन्हें पूरा कराने के लिए वजीर-ए-आला अखिलेश यादव के सामने पूरी वकालत करके मनवाऊंगा। इस मौके पर मांग की गई कि जो मान्यवर कांशीराम अरबी फारसी यूनिवर्सिटी बन रही है उसका नाम तब्दील करके अल्लामा फजले हक खैराबादी अरबी फारसी यूनिवर्सिटी रखा जाए, दर्जा एक से आठ तक उर्दू के टीचर रखे जाएं व उर्दू की भी किताबें फ्री दी जाएं, जुमे के दिन दो घंटे का इंटरवल दिया जाए।
इस प्रोग्राम में यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सीनियर आईए एस अनीस अंसारी, ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, नदवतुल उलमा लखनऊ के प्रिंसीपल मौलाना सईदुदर्रहमान आजमी, मौलाना आफताब नदवी खैराबादी को आना था मगर किसी ने भी शिरकत नहीं की।
आखिर में अशफाक अंसारी व नोमान सिद्दीकी ने शुक्रिया अदा किया इसके अलावा नदीम हसन खां, शालू किरमानी, यूनुस खां, हनीफ अंसारी, शब्बीर अहमद बिसवां, हाजी आसिफ हुसैन, हाजी आसिम हुसैन, अनीस अहमद, कारी सलाहउद्दीन, मतलूब हैदर, सलमान सिद्दीकी, इमरान किरमानी, कुर्बान अली, एहतिशाम आलम, जावेद अनवर, भरत त्रिपाठी, अरशद सिद्दीकी वगैरह मौजूद रहे।
 

कौमी एकता सोसाइटी की जानिब से हुई इस्तकबालिया तकरीब में डाक्टर वकार का खिताब
जंगे आजादी में उर्दू के रेाल को फरामोश नहीं किया जा सकता
शादाब हुसैन
बहराइच-
जिले की समाजी व अदबी तंजीम कौमी एकता सोसाइटी की जानिब से मुकामी नगर पालिका हाल में मुनअक्किद इस्तकबालिया प्रोग्राम को खिताब करते हुए मेहमाने खुसूसी रियासत के वजीर मेहनत डाक्टर वकार अहमद शाह ने कहा कि हिन्दुस्तान में पैदा हुई उर्दू जबान मुल्क की गंगा-जमुनी तहजीब की जीती जागती मिसाल है। मुल्क की आजादी की जंग में दूसरी और जबानों के साथ-साथ उर्दू के रोल को भी भुलाया नहीं जा सकता है।
अपने एजाज में मुनअक्किद इस्तकबालिया तकरीब को खिताब करते हुए डाक्टर वकार अहमद शाह ने कहा कि उर्दू जबान को किसी एक तबके व समाज की जबान कहना गलत है, उर्दू को किसी एक तबके की जबान बताने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि उर्दू जबान की पैदाईश ही दूसरे तबके व समाज के लोगों को अपनी बात एक दूसरे तक पहुंचाने के मकसद से ही हुई थी। डाक्टर शाह ने आगे कहा कि उर्दू जबान को इस बात पर फख्र है कि जब भी उसके दानिश्वरों की फेहरिस्त तैयार की जाती है तो उसमें किसी एक तबके व समाज के लोगों का नाम नहीं होता है बल्कि हिन्दुस्तान में रहने वाले हर तबके व समाज के लोगों का नाम शामिल होता है। उन्होंने कहा कि रियासती हुकूमत ने उर्दू को बढ़ावा देने के लिए इसे रोजगार से जोड़ने का अहम काम किया है। इसके तहत उर्दू की तालीम हासिल करने वालों को उर्दू टीचर के ओहदो पर भर्ती किया गया है ताकि लोगों को इस जबान को पढ़ने और समझने का ज्यादा से ज्यादा मौका मिल सके। उन्होंने इस इस्तकबालिया तकरीब में कहा कि इस एजाज की असल हकदार बहराइच की अमन पसंद अवाम है जिसने उन्हें बेहद प्यार व इज्जत दी है। इस तकरीब के दौरान डाक्टर वकार अहमद शाह ने उर्दू अकादमी के तआउन से कौमी एकता सोसाइटी की निगरानी में चलाए जा रहे मुफ्त उर्दू कोचिंग क्लासेज की तलबा को सर्टिफिकेट तकसीम करते हुए कहा कि वह अपनी इस तालीम को दूसरों तक भी पहुंचाएं।
इससे पहले कमेटी के मेम्बरान ने मेहमाने खुसूसी की गुलपोशी करके खैरमकदम किया। इसके बाद मेहमाने मोअज्जिज भागलपुर यूनिवर्सिटी के डाक्टर उबैदउल्लाह चैधरी ने खिताब करते हुए कहा कि उर्दू को फरोग देने के लिए एक तहरीक चलाने के साथ ही लोगों में उर्दू का शौक पैदा करने की जरूरत है। उन्होने उर्दू वालों से अपील की कि वह सरगर्मी अख्तियार कर रियासती हुकूमत पर दबाव बनाए कि आठवें दर्जे तक उर्दू को कम्पलसरी सब्जेक्ट बनाया जाए। इसके बाद मेहमाने खुसूसी डाक्टर वकार अहमद शाह ने हिन्दी के दामोदर दास मोदी और उर्दू अदीब गुलाम अली शाह को यादगारी निशान (स्मृति चिन्ह) देकर नवाजा। तकरीब की सदारत शायर असर बहराइची ने की। सेमिनार को महमूूद अली सेक्रेटरी शादाब हुसैन, सैयद खालिद महमूद, डाक्टर मुबारक अली, शमील अहमद किदवई, जमाल अजहर सिद्दीकी ने खिताब किया। इस प्रोग्राम में सैयद अकरम सईद, हाजी इमलाक खां, अलीमउल्लाह सिद्दीकी, जफर उल्लाह खंा, मोहम्मद हकदाद खां, निहाल अहमद, जमीर इस्लाम, आफताब अली खां, सैयद शफात अली, डाक्टर असुल वजूद खां, शफीक अहमद, अतीकुरहमान, मोहम्मद अफसाल, जिया रिजवी, राशिद राही, राजे मिर्जा, सैयद मसऊदुल मन्नान एडवोकेट, तालिब हुसैन, हाजी अनवर खान, मकसूद रायनी, हाफिज साजिद खां, हाजी इरशाद अली खां, मोहम्मद शाद, यासीन, वसीम, सनी, दानिश, जुनेद, अकील, मुश्ताक अली, मोहम्मद शाहनवाज, सज्जन सहारा, मोहम्मद शमीम व मोहम्मद इदरीस वगैरह मौजूद थे। प्रोग्राम की निजामत गुलाम अली शाह ने की।
 

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