येदुरप्पा को
ले डूबीं आरएसएस से सीखी बेईमानियां
नुमाइंदा खुसूसी
बंगलौर! दोबारा कर्नाटक के वजीर-ए-आला बनने का ख्वाब देख रहे
येदुरप्पा कब जेल की सलाखों के पीछे पहुंचेगे अब इसका इंतेजार किया
जा रहा है। इसका साफ इशारा उस वक्त साफ मिल गया जब साबिक वजीर-ए-आला
ने अपनी पेशगी जमानत की एक अर्जी अदालत में दाखिल की। यह कार्रवाई
उस वक्त की गई जब येदुरप्पा, उनके दो बेटों, एक दामाद और
जेएसडब्ल्यू स्टीम और साउथ वेस्ट माइनिंग के दफ्तरों पर एक साथ छापे
मारकर सीबीआई ने मुश्तबा कागजात और रिश्वत लेने के कुछ सुबूत हासिल
किए। वाजेह हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली ग्यारह मई को येदुरप्पा
के खिलाफ सीबीआई की जांच का हुक्म उस वक्त दिया था जब एक आला
अख्तियाराती कमेटी में अपनी रिपोर्ट में कर्नाटक के साबिक
वजीर-ए-आला और कारपोरेट हस्तियों पर कई इल्जाम लगाए और मरकजी एजेंसी
से सारे मामले की जांच की सिफारिश की थी। याद रहे कि लोकआयुक्त
संतोष हेगडे की नाजायज माइनिंग के मामले की एक रिपोर्ट में
येदुरप्पा का नाम आने से उन्हें वजीर-ए-आला के ओहदे से हटना पड़ा
था। जब एक अदालत ने नाजायज माइनिंग के सिलसिले में येदुरप्पा को
क्लीन चिट दी थी तो वह फिर से वजीर-ए-आला बनने की कवायद में मसरूफ
थे। मगर एक ही झटके में सबकुछ उनके हाथ से निकलता नजर आने लगा तो
उन्होंने अचानक रंग बदलते हुए न सिर्फ कर्नाटक के वजीर-ए-आला सदा
नंद गौडा बल्कि पार्टी आलाकमान पर सीधे निशाना साधना शुरू कर दिया।
पार्टी की उस वक्त और किरकिरी कर दी जब कांग्रेस सदर सोनिया गांधी
की तारीफ की और अपनी पार्टी की लीडरशिप को बुरा भला कहने से नहीं
चूके। वह पार्टी पर जो दबाव बनाना चाह रहे थे वह भी बेअसर साबित
हुआ। क्योंकि तीन दिन बाद ही सीबीआई ने कम से कम आठ ठिकानों पर छापे
मार कर उनके चेहरे पर पड़े नकाब को उतार फेंका और आर.एस.एस. से सीखी
बेईमानियों ने उनके पैरों को जंजीर बन कर जकड़ लिया है।
भारतीय जनता पार्टी इन दिनों जबरदस्त बोहरान में फंसी हुई है। कई
जगहों से बगावत की आवाजें बुलंद हो रही है। राजस्थान में वसुंधरा
राजे सिंधिया ने अपनी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है तो गुजरात
के वजीर-ए-आला नरेन्द्र मोदी और पार्टी के कौमी सदर नितिन गडकरी के
बीच पाई जाने वाली तल्खी रोज बरोज शिद्दत अख्तियार करती जा रही है।
उसके सामने सबसे बड़ा खतरा यह है कि तिनका-तिनका इकट्ठा करके इतने
दिनों में उसने जो आशियाना बनाया था वह बिखर ना जाए और तमाम मामलों
पर अब तक जो पर्दा पड़ा वह ना हटे।
येदुरप्पा आज जिस हालत में पहुंचे हैं उसके पीछे हद से बढ़ी
कुनबापरस्ती ही अस्ल वजह बताई जा रही है। जबकि पार्टी के कुछ करीबी
जराए यह कहने में नहीं हिचक रहे हैं कि येदुरप्पा सबकुछ समेट कर
अपने पास ही रखना चाहते थे। अपने बेटों, दामाद और रिश्तेदारों को
मालामाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब भाण्डा फूटा तो वह इसके
लिए अनंत कुमार, पार्टी के रियासती सदर केएस विश्वरैया और
वजीर-ए-आला सदानंद गौडा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। येदुरप्पा ने
पिछले हफ्ते जो तेवर दिखाए उससे पार्टी घबरा गई और उन्हें किसी तरह
मनाने में कामयाब हुई ही थी कि सीबीआई छापों ने एकाएक मंजर तब्दील
कर दिया। अब पार्टी में उनके लिए एक अजीब सी खामोशी है। वैसे भी जब
सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ सीबीआई जांच का हुक्म दिया था उसी
वक्त से पार्टी लीडरान उनसे दूर रहने को तरजीह देने लगे थे। मगर जब
पार्टी को यह खतरा महसूस हुआ कि पार्टी टूट ना जाए तो उन्हें मनाने
की कोशिशें शुरू हुई। पार्टी लीडर अरूण जेटली ने उन्हें इस बात पर
राजी कर लिया कि वह ना असम्बली से इस्तीफा देंगे और ना पार्टी से
और उन्हें आजादी होगी कि वह जम्हूरी दायरे में रहते हुए पार्टी
लीडरों खासकर अनंत कुमार विश्वरैया और वजीर-ए-आला विश्वरैया के बारे
में अवामी तौर पर अपने ख्यालात का इजहार कर सकते हैं। क्योंकि
पार्टी आला कमान यह चाहता है कि अगले साल होने वाले असम्बली एलक्शन
पर इस खींचतान का कम से कम असर पड़े। मगर ऐसा होता दिखाई नहीं दे
रहा है। ऐन मुमकिन है कि जब तक यह अखबार अपने पढ़ने वालों तक पहुंचे
येदुरप्पा ही नहीं उनके कुनबे के दूसरे लोग भी जेलों में पहुंच चुके
हों।
बिहार के कफील अहमद की कर्नाटक पुलिस के
जरिए गिरफ्तारी हद दर्जा अफसोसनाक
दहशतगर्दी
के नाम पर अंधाधुंध गिरफ्तारियों का सिलसिला बन्द हो
नुमाइंदा मरकज़
नई दिल्ली! बिहार के नौजवानों की गिरफ्तारी पर तशवीश का इजहार
करते हुए मेम्बर पार्लियामेंट व मारूफ आलिमेदीन मौलाना असरार उल हक
कासमी ने कहा कि बिहार सेे पिछले दिनों कर्नाटक पुलिस के जरिए
दहशतगर्दी के जुर्म में कफील अहमद की गिरफ्तारी का जो मामला सामने
आया वह हैरतजदा कर देने वाला है। उन्होंने ताज्जुब का इजहार करते
हुए कहा कि दूसरी रियासत की पुलिस बिहार में दाखिल होकर वहां के एक
नौजवान को गिरफ्तार करके ले जाती है और बिहार पुलिस को कानों कान
खबर तक नहीं होती। उन्होंने सवाल किया कि बिहार पुलिस वाकई गाफिल
रही या उसने जानबूझ कर चश्मपोशी से काम लिया?
दहशतगर्दी के इल्जाम में बगैर सबूतो के मुसलमानों को गिरफ्तार किए
जाने पर सख्त रद्देअमल का इजार करते हुए किशनगंज के एमपी मौलाना
असरार उल हक कासमी ने कहा कि यह इंतिहाई तकलीफ की बात है कि
मुसलमानों को दहशतगर्दी की आड़ में परेशान करने का सिलसिला अभी भी
जारी है। हालांकि बहुत से मुसिलम नौजवान अदालत के जरिए रिहा किए जा
चुके हैं और यह साबित हो चुका है कि वह बेकुसूर थे। जबकि पुलिस और
तफतीशी एजेंसियां बराबर उनके कसूरवार होने का दावा करती रही और झूटे
सबूत भी पेश करती रही। हैरानी की बात यह है कि हकायक के सामने आने
के बावजूद पुलिस और तफतीशी एजेंसियों ने अभी तक होश के नाखून नहीं
लिए हैं और वह अपनी पुरानी डगर पर चलते हुए मुसलमानों ही को तफतीश
का मेहवर समझ रही हैं और उन्हें गिरफ्तार कर रही हैं। मौलाना ने कहा
कि जब तक अस्ल दहशतगर्दों के गिर्द शिकंजा नहीं कसा जाएगा उस वक्त
तक दहशतगर्दी को खत्म नहीं किया जा सकगा। अलमिया यह है कि दहशतगर्द
पुलिस और तफतीशी एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर है और बेकुसूरों पर
पुलिस पूरा जोर लगा रही है। उन्होंने कहा कि दहशतगर्दी एक खतरनाक
काम है इसका कोई मजहब नहीं होता। इसलिए इसकेा मजहब से न जोड़कर देखा
जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस सिलसिले में असरदार
इकदामात उठाने चाहिए ताकि बेकुसूरों की गिरफ्तारी का सिलसिला बन्द
हो। उन्होंने बिहार सरकार से भी मतालबा किया कि वह इस बात को यकीनी
बनाए कि आइंदा दूसरे सूबे की पुलिस के जरिए गैर कानूनी तौर पर
बिहार से किसी शख्स की गिरफ्तारी का वाक्या पेश न आए।
बीजेपी के ”चरित्र“ का एक चेहरा
अय्याश धु्रव सिंह
नुमाइंदा मरकज़
भोपाल! आरटीआई एक्टिविस्ट शहला मसूद की कई बीजेपी लीडरों से
खासी नजदीकी थी। यह बात उनके कत्ल के कुछ दिनों बाद ही सामने आ गई
थी। मगर शहला मसूद के कत्ल की जब गुत्थी सीबीआई ने सुलझााई तो फैशन
डिजाइनर जाहिदा परवेज को इसमें शामिल पाया। सीबीआई ने अपनी तहकीकात
में पाया कि जाहिदा परवेज ने किराए के कातिलो से शहला मसूद का कत्ल
कराया। कत्ल की वजह बताइ गई बीजेपी के मेम्बर असम्बली और मध्य
प्रदेश के टूरिज्म कारपोरेशन के चेयरमैन रहे द्दु्रव नारायण सिंह
से शहला मसूद की बढ़ती हुई नजदीकियां। क्योंकि जाहिदा परवेज खुद
द्दु्रव नारायण सिंह की माशूका थी। हालांकि बाद में जाहिदा अपने
बयान से मुकर गई और उसने शहला के कत्ल का इल्जाम द्दु्रव नारायण
सिंह पर लगा दिया था। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में बीजेपी एमएलए
द्दु्रव नारायण सिंह और जाहिदा परवेज के बीच जिस्मानी रिश्ते होने
का जिक्र किया है। खबर तो यहंा तक है कि जाहिदा ने अपने दफ्तर में
द्दु्रव नारायण सिंह के साथ सेक्स करते हुए अपने वीडियो भी बना लिए
थे जो अब सीबीआई के पास है। जाहिदा ने भले ही द्दु्रव सिंह की
मोहब्बत या इश्किया रकाबत की आग में जलकर शहला मसूद का कत्ल करा
दिया हो मगर द्दु्रव नारायण सिहं की वह (जाहिदा) कोई पहली माशूका
नहीं थी। तहकीकात में यह बात भी सामने आई कि द्दु्रव नारायण सिहं
की पन्द्रह माशूकाएं रह चुकी है जिनके खर्च वह खुद उठाता था। बावन
साल के रंगीन मिजाज मेम्बर असम्बली द्दु्रव नारायण सिंह बीजेपी के
चाल चरित्र का अय्याश चेहरा कहा जा रहा है।
वाजेह हो आरटीआई एक्टिविस्ट शहला मसूद को उस वकत उनके घर के बाहर
कत्ल कर दिया गया था जब वह अन्ना हजारे की हिमायत में होने वाले
द्दरने में शिरकत के लिए जा रही थी। इस कत्ल के बाद जब पुलिस ने
तहकीकात की तो बीजेपी लीडर तरूण विजय के साथ उनकी नजदीकियां होने
की बात तो सामने आई मगर शहला के कत्ल से कोई कनेक्शन नहीं जुड़ पा
रहा था। इस बीच आरटीआई एक्टिविस्टों व दीगर तंजीमों ने हंगामा किया
तो इस कत्ल की तहकीकात सीबीआई को सौंप दी गई। काफी दौड़ द्दूप के
बाद सीबीआई के हाथ फैशन डिजाइनर जाहिदा परवेज तक पहुंचे और यह
इंकशाफ हुआ कि जाहिदा ने किराए के कातिलों से शहला मसूद का कत्ल
कराया क्योंकि जाहिदा को द्दु्रव नारायण सिंह से बढ़ती नजदीकियां
पसंद नहीं थी। इसके अलावा मध्य प्रदेश टूरिज्म से मिलने वाले तमाम
ठेकों में शहला की बेजा मदाखिलत से जाहिदा बहुत नाराज थी। दरअस्ल
जाहिदा और द्दु्रव नारायण की बहुत पुरानी दोस्ती थी इसीलिए उन्होंने
जाहिदा को बगैर जरूरी डिग्रियों के महज अपने ताल्लुकात की बिना पर
मध्य प्रदेश टूरिज्म में रजिस्टर्ड अर्किटेक्ट के तौर पर शामिल
कराया था। जिसके बारे में जानकारी के लिए शहला आरटीआई में अर्जी
डालने वाली थी। द्दु्रव नारायण सिंह चूंकि एक रंगीन मिजाज और
अय्याश आदमी है उसे जाहिदा और शहला से कोई फर्क नहीं पड़ता था। शहला
ने भी आगे बढ़ने के लिए द्दु्रव सिंह को सीढ़ी बनाया और वह बीजेपी
में लीडर बनना चाहती थी। छोटा-मोटा चुनाव भी लड़ चुकी थी। शहला के
चूंकि बीजेपी के बड़े कहे जाने वाले लीडर तरूण विजय से भी करीबी
रिश्ते थे और उसने द्दु्रव नारायण सिंह से भी नजदीकियां बढ़ा ली
थी। शहला से कही ज्यादा खूबसूरत होने के बावजूद शहला की रफ्तार
देखकर जाहिदा डर गई थी और उसने शहला को कत्ल करवा दिया। इस मामले
में जाहिदा के साथ उसकी दोस्त सबा फारूकी भी पकड़ी गई। बाद में
जाहिदा और सबा ने अलग-अलग जगह बयान देते हुए इस कत्ल मामले का
मास्टर माइंड बीजेपी के मेम्बर असम्बली द्दु्रव नारायण सिंह को
बताया।
दरअसल जब तक जाहिदा पर द्दु्रव नारायण सिंह के इश्क का भूत सवार रहा
वहअपने सर इस कत्ल का इल्जाम लिए रही और कत्ल की वजह अपने शौहर से
शहला मसूद की बढ़ती नजदीकियां बताया था, मगर जैसे-जैसे सीबीआई
तहकीकात आगे बढ़ी और सीबीआई ने द्दु्रव नारायण सिंह का लाई
डिडेक्टर टेस्ट वगैरह करवाया। इस टेस्ट से द्दु्रव सिंह की अय्याशी
की जो दास्तान सामने आई गालिबन उसके बाद ही जाहिदा और उसकी सहेली
सबा ने इस कत्ल के लिए बीजेपी लीडर द्दु्रव नारायण सिंह को
जिम्मेदार ठहराते हुए उसे ही इसका मास्टर माइंड बता दिया। इनका कहना
था कि शहला ने द्दु्रव नारायण सिंह से नजदीकियां बढ़ा कर उसके कई
राज मालूम कर लिए जिनकी बिना पर वह उन्हें ब्लैकमेल करने की द्दमकी
दे रही थी। इस काम में राइट टू इंफारमेशन उसका सबसे बड़ा हथियार
था। इन दोनों का कहना था कि जब द्दु्रव सिंह ने देखा कि शहला आसानी
से पीछा छोड़ने वाली नहीं है तो किराए के कातिलों के जरिए उसे हमेशा
के लिए चुप करा दिया गया।
तहकीकात के दौरान जब सीबीआई ने द्दु्रव नारायण सिंह से पूछगछ की और
उनका लाई डिडेक्टर टेस्ट कराया तो उसे कई चैकाने वाली जानकारियां
मिली। उन बातों से द्दु्रव नारायण सिंह की रंगीन मिजाजी और अय्याशी
की हैरतअंगेज दास्तान सामने आई जिसे देखकर सीबीआई टीम की आंखे फटी
की फटी रह गईं। सीबीआई को पता चला कि बावन बरस की उम्र के बीजेपी
एमएलए द्दु्रव नारायण सिंह इस उम्रमें इतना अय्याश है कि उसकी
तकरीबन पन्द्रह माशूकाएं थी, जिनका तमाम खर्च द्दु्रव नारायण सिंह
उठाए हुए थे। यहां तक कि उन्हांेने मोबाइल फोन और सिम कार्ड तक
खरीद कर उन सबको दिया था। यह खबर आम होने पर सोशल साइट्स पर लोग
चटखारे दार तब्सिरे करने लगे और ट्वीटर पर महेश मूर्ति ने इस
अय्याशी को भारत के मवासिलाती इंकलाब (टेलीकाम क्रांति) की वजह
बताया।
द्दु्रव नारायण सिंह की रंगीन मिजाजी और अय्याशी के किस्से आम होने
के बाद भारतीय जनता पार्टी के लीडरों केा जैसे सांप सूंघ गया है।
‘पार्टी विद द डिफरेंस’ का नारा लगाने वाली बीजेपी यह सब देखकर
हैरत में है। हालांकि शहला मसूद कत्ल मामले में उनका नाम आने के
बाद उन्हें पार्टी आला कमान ने मध्य प्रदेश बीजेपी के नायब सदर ओहदे
से हटा दिया था। द्दु्रव सिंह मध्य प्रदेश स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट
कारपोरेशन के भी चेयरमैन रह चुके हैं और इस वक्त भोपाल डिवीजन
एसोसिएशन के सदर हैं।
ध्ुरव नारायण सिंह का ताल्लुक मध्य प्रदेश के एक असरदार सियासी
खानदान से है। उनके वालिद गोविंद नारायण सिंह 1967 से 1969 दो साल
तक मध्य प्रदेश के वजीर-ए-आला थे और फिर 1988.89 में बिहार के
गवर्नर भी रहे थे। खुद द्दु्रव नारायण सिंह शादीशुदा है और उसके दो
बच्चे हैं। द्दु्रव सिंह पर हालांकि जाहिदा और उसकी सहेली सबा ने
शहला का कत्ल कराने का इल्जाम लगाया है मगर खबर लिखे जाने तक
सीबीआई के हाथों ऐसे कोई सुबूत नहीं लगे थे जिनकी बुनियाद पर
द्दु्रव नारायण सिंह को इस कत्ल में शामिल बताया जा सके। मगर उनकी
अय्याशी के किस्से सामने आने से बीजेपी की फजीहत तो हो ही गई।
हज 2012 के लिए हज पर जाने वालों की
लाॅटरी
रियासत के आज़मीने हज का कोटा
ज़रूरत से कम
शबीहुल हसन नगमी
लखनऊ! उत्तर प्रदेश के नौजवान वजीर-ए-आला अखिलेश यादव ने कहा
कि रियासत के आजमीने हज का कोटा जरूरत से कम है। इसमे इजाफा करने
के लिए वह मरकजी हुकूमत को खत लिख कर अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि
पिछली हुकूमत के दौरान हज पर जाने वालो को बहुत दिक्कतों का सामना
करना पड़ा था, लेकिन सूबे की समाजवदी सरकार आजमीने हज के लिए हर
बेहतर बंदोबस्त करने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि बनारस और उसके
आस पास के लोगों को हज पर जाने मे दिक्कतें ना आए इसके लिए जल्द ही
बनारस में एक हज हाउस की तामीर कराई जाएगी। इसके अलावा गाजियाबाद
में जेरे तामीर हज हाउस को जल्द ही मुकम्मल करा लिया जाएगा।
वजीर-ए-आला अखिलेश यादव इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में इस साल हज पर
जाने वालों के कुरा अंदाजी (लाटरी ड्रा) प्रोग्राम के मौके पर
खिताब कर रहे थे।
हज जैसे मुकद्दस फरीजे को अदा करने और खाना-ए-खुदा का तवाफ व
जियारत करने की ख्वाहिश हर मुसलमान के दिल में होती है। लेकिन हर
मुसलमान के दिल की ख्वाहिश पूरी नहीं होती। दरअस्ल अल्लाह के घर की
जियारत और हज की सआदत उसी को नसीब होती है जिसकी तकदीर में कातिबे
तकदीर यह सआदत लिख देता है। यही वजह है हज पर जाने की दरख्वास्तें
देेने वालों में ग्यारह हजार तीन सौ चैसठ (11364) लोग हज की सआदत
से महरूम रहे। वजीर-ए-आला अखिलेश यादव ने सबसे पहले आगरा के रहने
वाले आरिफ नाम के शख्स का कुरा निकाला। कुरा अंदाजी हो जाने के बाद
वजीर-ए-आला अखिलेश यादव ने कहा कि जिन लोगों का नाम हज के लिए निकल
आया है उन्हें मुबारक हो और जिनका नाम इस साल नहीं आया है वह मायूस
ना हों।
इस साल उत्तर प्रदेश से कुल छत्तीस हजार सात सौ तेइस (36723) लोगों
ने हज पर जाने के लिए दरख्वास्तें जमा की थी, जबकि रियासत से हज पर
जाने वालों का कोटा मरकजी हज कमेटी के जरिए पच्चीस हजार तीन सौ
उनसठ (25359) तक किया गया। इनमें पन्द्रह हजार पांच सौ इक्यानवे
(15591) लोगों को लाटरी के जरिए चुना गया जबकि छः हजार आठ सौ लोगों
को सीद्दे चुना गया। ए व बी कटेगरी के जरिए दो हजार नौ सौ अरसठ लोगों
को चुना गया। सूबे के चवालीस जिलों में चूंकि तयशुदा कोटे से कम
दरख्वास्त फार्म जमा हुए थे इसलिए उन्हें लाटरी में शामिल ना करके
सीधे मुंतखब किया गया। मुरादाबाद से सबसे ज्यादा चार हजार दो सौ
अट्ठाननवे (4298) दरख्वास्त फार्म जमा हुए जबकि सबसे कम आठ फार्म
चित्रकूट से जमा हुए थे। लखनऊ से इस बार छः सौ छाछठ खुशनसीब लोगो
को हज पर जाने का मौका मिला है। जिन लोगों के नाम लाटरी में निकल
आए हैं उन सभ्ीा को ग्यारह जून तक हज सफर की पहली किस्त के तौर पर
इक्यावन हजार रूपए एसबीआई के खाते में जमा कराने होंगे। वजीर-ए-आला
अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी सरकार की हर मुमकिन कोशिश होगी कि हज
पर जाने वालों को किसी किस्म की परेशानी ना हो। उन्होंने कहा कि अभी
दूर-दराज के हाजियों को लखनऊ आना पड़ता है जिससे उन्हें दिक्कते
होती है लिहाजा बनारस में एक हज हाउस की तामीर कराई जाएगी। इसके
लिए जमीन तलाशी जा रही है जैसे ही जमीन मिल जाएगी वैसे ही हज हाउस
की तामीर का काम भी शुरू हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने गाजियाबाद
में आधा अधूरा बना हज हाउस जल्द तामीर कराने की बात कही। अखिलेश
यादव ने कहा कि गाजियाबाद में जो हज हाउस बनाया जा रहा था उस पर
तकरीबन तीन सौ करोड़ रूपए खर्च हो चुके हैं और अभी उसे मुकम्मल
कराने में मजीद बाइस करोड़ रूपए की जरूरत है जिसे हमारी सरकार देगी।
उन्होंने कहा कि आप लोगों की दुआओं और मेहनत से ही यह हुकूमत कायम
हुई है लिहाजा मुसलमानों की तरक्की के कामों में पैसे की कोई कमी
नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछली हुकूमत ने पांच सालों के
दौरान हज हाउस के रख रखाव और मरम्मत के काम पर ध्यान नहीं दिया गया
है। लिहाजा उसकी मरम्मत वगैरह का काम कराकर आजमीन हज को सहूलते देने
की हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। उन्होंने जिन लोगों का नाम हज पर जाने
के लिए लाटरी से निकाला है उन्हें उनके अच्छे सफर के लिए नेक
ख्वाहिशात का इजहार किया। अखिलेश यादव ने कहा कि इस बार कोटा कम कर
दिए जाने की वजह से खासे लोग हज का फरीजा अदा करने से महरूम रह गए
हैं लेेकिन उन्हें मायूस नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह
आजमीने हज का कोटा बढ़ाए जाने के सिलसिले में खुद मरकजी हुकूमत से
अपील करेंगे। ताकि हज का फरीजा अदा करने से कोई महरूम ना रह जाए।
इस मौके पर उनके साथ मौजूद उत्तर प्रदेश स्टेट हज कमेटी के चेयरमैन
और अकलियती बहबूद व शहरी तरक्कीयात के वजीर मोहम्मद आजम खा ने कहा
कि गुजिश्ता पांच बरसों में हज हाउस बदनज्मी का शिकार रहा है। जो
तामीर कराई भी गई थी वह बेदह घटिया थी जिसकी वजह से दो कमरों की छत
गिर गई थी। अब ऐसा नहीं होगा हज हाउस में ठीक तरह से बंदोबस्त किए
जांएगे ताकि आजमीने हज को किसी तरह की दिक्कत न हो इस साल जिन लोगों
को पहली ही बार में हज का मुकद्दस फरीजा अदा करने की सआदत हासिल हो
गई है। उनमें खुर्रमनगर के रहने वाले मुशर्रफ अली और उनकी बीवी
आसिया है। आदिलनगर के सगीर अहमद अपनी बीवी सुहेला सगीर के साथ
जाएंगे, खदरा के रहने वाले इसरार अहमद अपनी बीवी असमा के साथ जा रहे
हैं। त्रिवेणी नगर के कमर हुसैन उनकी बीवी आबदा बेगम, गोलागंज के
मुशीर आलम उनकी बीवी नसरीन फातिमा, अलीगंज के मंजूर अली सिद्दीकी
उनकी बीवी कैसर जहां के अलावा बाराबंकी जिले की तहसील फतेहपुर की
रहने वाली तसनीम फातिमा को पहली ही बार में हज का फरीजा अदा करने
की सआदत हासिल हुई है।
जंगल, जानवर और माहौलियात पर हुआ
दो रोजा सेमिनार
शादाब हुसैन
नेपालगंज- जंगल, जंगली जानवर और माहौलियात (पर्यावरण) पर नेपाल
के जिला बर्दिया व महेन्द्रनगर में दो रोजा सेमिनार तराई आर्कलैण्ड
व नेपाल वातावरण पत्रकार समूह की जानिब से प्रोग्राम आईनाइजर
पूर्णहरिमाते की सदारत में हुआ। जिसमें भारत-नेपाल के दर्जनों सरहदी
इलाकों के सहाफियों ने शिरकत की। बतौर मेहमाने खुसूसी
डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ नेपाल की कम्युनिकेशन अफसर सिमरिका शर्मा ने
खिताब करते हुए मौजूदा हालात का जिक्र करके खासकर मीडिया नुमाइंदो
से इस सब्जेक्ट की कवरेज दिलचस्पी से कर लोगों को बेदार और हुकूमत
को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराने पर जोर दिया।
सेमिनार को खिताब करते हुए कम्युनिकेशन अफसर सिमरिका शर्मा ने बताया
कि नेपाल के कुल रकबा 1400 स्क्वायर किलोमीटर में तेइस फीसद जंगली
इलाका है जिसका ज्यादातर हिस्सा भारत की सरहद से जुड़ा है इसलिए
दोनों मुल्कों की जिम्मेदारी बनती है कि वह जंगल, जंगली जानवरों की
हिफाजत के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि इसके लिए हुकूमत तो अपनी
जिम्मेदारी पूरी करती है लेकिन लोगों में बेदारी न होेने से तमाम
मसायल पैदा होते हैं। इसलिए मीडिया नुमाइंदो का रोल इस मामले में
अहम हो सकता है। इस मौके पर उन्हांेने नेपाल में 1995 में कायम
डब्ल्यू डब्ल्यूएफ और 2000 से चलाई जा रही तराई आर्कलैण्ड
प्रोजेक्ट के बारे में भी रोशनी डाली। प्रोग्राम को खिताब करते हुए
आर्गनाइजर पूर्णहरिमाते ने कहा कि जंगल, जानवर और माहौलियात (पर्यावरण)
इंसान के लिए जरूरी है इसीलिए इन सबकी हिफाजत करना भारत और नेपाल
के लोगों की जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोनों
मुल्कों के मसायल एक जैसे हैं इसलिए इस पर गौर फिक्र के लिए हमें
एक साथ मीटिंग करके रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों
में बेदारी और जिम्मेदारी का एहसास हो जाने से बचाव किया जा सकता
है। जिसमें सहाफियों, दानिश्वरों, अवामी नुमाइंदों और समाजी कारकुनों
का रोल अहम है।
प्रोग्राम में अपने ख्यालात का इजहार करते हुए नेपाली सहाफी
धर्मेन्द्र चन्द्र ने कहा कि भारत-नेपाल के अफसरों के बीच होने वाली
मीटिंगों से कोई नतीजा नहीं निकलता है। उन्होंने कहा कि जंगल से सटी
आबादी के मसायल पर ध्यान देना होगा। बीबीसी नेपाल के रिपोर्टर
उमेदबाग चन्द ने कहा कि इस मौजू पर मीडिया में कम लिखा जा रहा है
जिससे लोगों को हो रहे नुक्सान की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा
कि मीडिया को अपनी रिर्पोटिंग से समाज के सभी लोगों को जिम्मेदारी
समझाते हुए बेदार करने से इस कीमती अमानत को बचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि क्लाइमेट बदलने से इंसान और जानवर सभी परेशान और
खतरे में है। बहराइच के सहाफी एमएस परिहार ने कहा कि इंसान की
हिफाजत के लिए दोनों मुल्कों के लोगों को इसके बचाव व तहफ्फुज के
लिए लोगों को बेदार कर तहरीक चलाने की जरूरत है। जदीद मरकज के
देवीपाटन डिवीजन के रिर्पोटर शादाब हुसैन ने कहा कि इन मुद्दों से
सियासी फायदा हासिल ना होने से सियासी हलका इसे नजरअंदाज करता है
और हुकूमते संजीदा नहीं होती है उन्होंने कहा कि बेदारी पैदा करने
से ही हुकूमत दिलचस्पी लेगी तो तमाम मसायल हल होंगे। उन्होने कहा
कि हुकूमत और इंतेजामिया की लापरवाई व सांठगांठ से जानवरों की
स्मगलिंग, शिकार व लकडि़यों की नाजायज कटान थमने का नाम नहीं ले रही
है। सत्य प्रकाश गुप्ता ने कहा कि नाजायज कटान के मुकाबले हमें चारो
तरफ हरे पेड़ लगाने पर जोर देना चाहिए। प्रोग्राम की निजामत नेपाल
के सीनियर सहाफी पूर्णलाल चुके ने की। सेमिनार में सहाफी कैलाश
थपलियाल, दीपक फुलेरा, शुक्ला फाटा नेशनल पार्क के असिस्टेंट
वार्डेन चन्द्रबहादुर चन्द, कर्णकुंवर, अकबर अली कुरैशी, आनन्द
पोददार, कुंवर दिवाकर सिंह, नारायन दत्त, उत्तराखण्ड के सहाफी
दिनेश, रूपेश कुमार, रबी शर्मा (काठमांडू), विनय शुक्ला, बच्चू
विश्वकर्मा व गोपाल बहादुर घिथिरे वगैरह मौजूद थे।