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Dec 5-11
चीफ विजिलेंस कमिश्नर का मामला कांग्रेस के गले की हड्डी बना, सरकार को
इस ओहदे पर बेईमान अफसर ही क्यों पसंद आया?
मनमोहन की ईमानदारी पर शक
हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह ईमानदार नहीं है या वह ऐसे
बेईमानों के काकस में घिर गए हैं कि सरकार में उनकी चलती ही नहीं यह
बात तो मनमोहन सिंह ही बता सकते हैं लेकिन चीफ विजिलेंस कमिश्नर
पी.जे.थॉमस के मामले में सरकार का जो रवैया है उससे मनमोहन सिंह की
ईमानदारी शक के दायरे में आ गई है। वह ईमानदार है इस पर तरह-तरह के
सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस सदर सोनिया गांधी भी शायद यह समझ नहीं पा
रही हैं कि मनमोहन ंिसह की कयादत वाली यूपीए सरकार केरल के अफसरान के
गरोह के चंगुल में फंस कर जिस तरह काम कर रही है उससे कांग्रेस को न
सिर्फ बहुत बड़ा सियासी नुक्सान हो रहा है बल्कि पार्टी रोज-ब-रोज
सियासत की गहरी खाई में धंसती चली जा रही है। बिहार असम्बली इंतखाबात
के जो नतायज सामने आए हैं उसकी असल वजह भी मनमोहन सिंह हुकूमत में हो
रहे घपले और घोटाले ही हैं। अगर जल्द ही सोनिया गांधी और उनके मुशीरों
(सलाहकारों) ने मरकजी हुकूमत और देश को वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह और उन्हें
कठपुतली की तरह नचाने वाले मफादपरस्त नौकरशाहों के चंगुल से आजाद न किया
तो कांग्रेस पार्टी और उसके युवराज कहे जाने वाले राहुल गांद्दी का
सियासी मुस्तकबिल खतरे में पड़ जाएगा। कांग्रेस के सीनियर लीडरान और देश
के जिम्मेदार शहरी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि मनमोहन सिंह की ऐसी क्या
मजबूरी है कि उन्होंने पी.जे.थामस जैसे बेईमान और नाकारा कहे जाने वाले
एक मामूली नौकरशाह के लिए अपनी सरकार और कांग्रेस पार्टी की साख ही
दांव पर लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट में मनमोहन सिंह हुकूमत ने गुजिश्ता दिनों यह हलफनामा
दाखिल करके कि टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले की तहकीकात की निगरानी मौजूदा
चीफ विजिलेंस कमिश्नर नहीं करेंगे, खुद ही तस्लीम कर लिया है कि थामस
बेईमान हैं। सीबीआई जितनी भी बेईमानियों की तहकीकात करती है उस पर सीधा
कंट्रोल चीफ विजिलेंस कमिश्नर का ही होता है। अब अगर इस मामले में
तहकीकात की निगरानी चीफ विजिलेंस कमिश्नर नहीं करेंगे तो फिर इस
तहकीकात का क्या मकसद है? थामस को जिस तरीके से मुल्क का चीफ विजिलेंस
कमिश्नर बनाया गया था वह तरीका ही बेईमानी को जनम देने वाला था। चीफ
विजिलेंस कमिश्नर का इंतखाब मुल्क के वजीर-ए-आजम, होम मिनिस्टर और
लोकसभा में लीडर आफ अपोजीशन तीनो मिलकर इत्तेफाक राय से करते हैं। इस
मामले में लीडर आफ अपोजीशन सुषमा स्वराज ने पहले ही दिन न सिर्फ
मुखालिफत जाहिर की थी बल्कि मीटिंग की प्रोसीडिंग में तहरीरी तौर पर
इख्तेलाफ (विरोध) भी जाहिर किया था। थामस के नाम पर वह मुत्तफिक (सहमत)
नहीं हैं, इनके अलावा सरकार जिस किसी शख्स को भी चाहे उसे चीफ विजिलेंस
कमिश्नर बना सकती है। लीडर आफ अपोजीशन के इस एतराज के बावजूद खुद को
ईमानदारी की अलामत बताने वाले वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह और होम मिनिस्टर
पी.चिदम्बरम ने थामस जैसे बेईमान शख्स को ही चीफ विजिलेंस कमिश्नर
बनाकर देश को यह पैगाम दे दिया था कि मनमोहन सिंह हुकूमत में ईमानदारी
सिर्फ कहने की बात है।
चीफ विजिलेंस कमिश्नर पी.जे.थामस के दामन पर सिर्फ टूजी स्पेक्ट्रम
घोटाले के ही दाग नहीं है। क्योंकि जब स्पेक्ट्रम के एलाटमेंट हुए उस
वक्त थामस ही मुल्क के कम्युनिकेशन सेक्रेटरी थे बल्कि इनके माथे पर
पामोलिन आयल की खरीदारी में बड़े पैमाने पर बेईमानी का कलंक तो उसी वक्त
लग गया था जब वह केरल में फूड एंड सिविल सप्लाई के सेक्रेटरी थे।
पामोलिन आयल खरीद के घपले में थामस के खिलाफ कोई मामूली कार्रवाई नहीं
हुई थी। उन पर बाकायदा बेईमानी का मुकदमा दर्ज किया गया था, उन्हें
अदालत से जमानत लेनी पड़ी थी। मुकदमा अभी भी खत्म नहीं हुआ है जिसमें
थामस जमानत पर छूटे मुलजिम हैं।
थामस जैसे शख्स को देश का सीवीसी बनाकर मनमोहन सिंह ने कई तरह के अफवाहों
और शकूक (संदेह) को जनम दिया है। खुद मनमोहन सिंह गरोह की गुर्गों ने
अब दिल्ली में यह अफवाहें फैलानी शुरू कर दी है कि थामस को सीवीसी बनाने
के लिए ÷÷चर्च'' (इसाई लाबी) का सोनिया गांधी पर जबरदस्त दबाव है। इसी
मजबूरी में मनमोहन ंिसह ने उन्हें सीवीसी बनाया है और अब हटा नहीं पा
रहे हैं। सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह हुकूमत को चाहिए कि इस किस्म की
अफवाहों की भी तहकीकात कराएं।
क्या है विकीलीक्स
नुमाइंदा मरकज
विकीलीक्स की तरफ से अमरीकी सिफारतखानों से मुताल्लिक ढाई लाख खुफिया
पैगाम जारी किए जाने के बाद अमरीका समेत पूरी दुनिया में हड़कम्प मच गया।
तारीख में खुफिया मालूमात का इतना बड़ा इंकशाफ इससे पहले कभी नहीं हुआ
था। विकीलीक्स ने इससे पहले इराक और अफगानिस्तान में अमरीकी फौज की
ज्यादती की पोल खोलकर अमरीका की नींद उड़ा दी थी।
विकीलीक्स एक वेवसाइट है जो हस्सास दस्तावेज शाया करती है। यह एक
इंटरनेशनल गैर मुनाफे मीडिया तंजीम है। इसमें दस्तावेज मुहैया कराने
वाले का नाम खुफिया रखा जाता है। यह दस्तावेज किसी मुल्क की सरकार,
कम्पनी, तंजीम या किसी मजहबी तंजीम के बीच हो सकते हैं।
२००६ में जूलियन असांजे नाम के शख्स ने विकीलीक्स वेवसाइट की शुरूआत
की। असांजे विकीलीक्स डॉट के एडीटर इन चीफ और तर्जुमान हैं। असांजे का
मानना है कि उनकी पांच लोगों की टीम ने इतने अहम और खुफिया दस्तावेज
जारी किए है जितनी पूरी दुनिया की मीडिया में नहीं किए गए हैं। इस
वेवसाइट का काम दि सन शाइन प्रेस करती है। अपने शुरूआत के एक साल के
अंदर ही वेवसाइट ने दावा किया था कि उसकी वेवसाइट पर बारह लाख से भी
ज्यादा ऐसे दस्तावेज हैं जिनके बारे में दुनिया नहीं जानती।
२००८ में इग्लैण्ड की इकनोमिस्ट मैगजीन ने विकीलीक्स को न्यू मीडिया
अवार्ड दिया था। २००९ में विकीलीक्स और इसके सरबराह असांजे को एमिनिस्टी
इंटरनेशनल ने यूके मीडिया अवार्ड दिया। मई २०१० में न्यूयार्क डेली
न्यूज ने विकीलीक्स को उन वेवसाइट्स की फेहरिस्त में सबसे ऊपर रखा जिनमें
खबरें बदल देने की सलाहियत है। विकीलीक्स को कोई भी शख्स ऐसी मालूमात
इलेक्ट्रानिक ड्राप बाक्स के जरिए दे सकता है जो सेंसर्ड हो। जिस पर
पाबंदी हो या पहले कभी न शाया हुई हो। विकीलीक्स खबर देने से मुताल्लिक
मालूमात जमा करने के विकीलीक्सडाटओआरजी आनलाइन चैट की भी सहूलत है।
१९७१ में पैदा हुए असांजे १९८० की दहाई के आखिर में हैकिंग करने वाले
गु्रप इंटरनेशनल ससर्विस के रूक्न थे। इस ग्रुप को मेनडेक्स के नाम से
भी जाना जाता था। इस दौरान १९९१ में मेलबर्न में मौजूद असांजे के घर पर
आस्ट्रेलियाई पुलिस ने छापामारी भी की थी। १९९४ में असांजे ने
कम्प्यूटर प्रोग्रामर की हैसियत से काम करना शुरू किया। १९९९ में असांजे
ने लीक्सओआरजी नाम से एक डोमेन रजिस्टर कराया था। लेकिन असांजे का कहना
है कि उस वक्त उन्होंने उस डोमेन पर कोई काम नहीं किया था।
असांजे अमरीका के लिए लम्बे अर्से से सरदर्द बने हुए हैं। उन्होंने
इराक जंग से मुताल्लिक तकरीबन चार लाख दस्तावेज अपनी वेवसाइट पर जारी
किए थे जिसमें अमरीका, इंग्लैण्ड और नाटो की फौजों के शदीद जंग जुर्म
करने के सुबूत मौजूद होने का दावा किया गया था। अमरीका के सदर बराक
ओबामा तक ने उन्हें इसके खिलाफ खबरदार किया। इसके बाद गिरफ्तारी के डर
से उन्हें छुप छुप कर जिंदगी गुजारनी पड़ी। एक इंटरव्यू में असांजे ने
कहा कि वह झूटे नामों से होटलों में रह रहे हैं। अपने बालों को दूसरे
रंगो में रंग रहे हैं और क्रेडिट कार्ड की जगह नकद रकम का इस्तेमाल कर
रहे है। इसके लिए अक्सर उन्हें अपने दोस्तों से पैसे उद्दार लेने पड़ते
हैं। अगस्त २०१० में असांजे पर एक खातून पर ज्यादती करने का इल्जाम भी
है। साथ ही यह इल्जाम भी लगा कि दो दिनों बाद ही असांजे पर स्वीडन की
राजद्दानी स्टोकहोम में एक खातून के साथ जिंसी ज्यादती का इल्जाम लगा।
असांजे ने अपने बचाव में कहा कि मेरे एक खातून के साथ जिस्मानी
ताल्लुकात बने थे लेकिन वह दोनों की मर्जी से हुआ था। असांजे ने कहा कि
मेरे ऊपर इल्जाम लगाने वाले दरअस्ल विकीलीक्स इंकशाफात से सहमे हुए
हैं। ताजा मामले में दुनिया भर के मुल्कों में अमरीकी सफीरों से फारेन
मिनिस्ट्री को भेजे गए खुफिया पैगामात से जुड़ा है। जिसने अमरीकी फारेन
मिनिस्ट्री की हिकमते अमली की पोल खोल दी। इल्जाम है कि यह खुफिया
पैगाम अमरीकी फौजी ब्रेडले मेनिंग ने ही चोरी की और विकीलीक्स के बानी
असांजे को सौंप दिया।
इन खुफिया दस्तावेजात को समेटने वाले टेक्स्ट फाइल का साइज १.६ गीगा
बाइट है। आने वाले दिनों में इस दस्तावेज के अवामी होने से और बड़े
खुलासे सामने आएंगे। दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमरीका के इत्तेहादी और
दुश्मन मुल्कों की भी क्या पालीसी है एक-एक कर पर्ते खुल रही है।
विकीलीक्स की तरफ से दुनिया भर के दो सौ पचास से ज्यादा मुल्कों में
वाके अमरीकी सिफारतखानों की २५१२८७ फाइलें अवाम के लिए जारी की है। जो
अमरीकी इंतजामिया को भेंजी गई थी इन फाइलों पर लिखा था कि उन्हे गैर
अमरीकियों को किसी भी सूरत में नहीं दिखाया है। अमरीकी फौज के मुताबिक
ब्रेडले मेनिंग (२२) नाम के एक फौजी पर खुफिया दस्तावेज लीक किए जाने
का शुब्हा है जो पहले बगदाद के पास एक फौजी कैम्प पर तैनात था। उस फौजी
ने न सिर्फ अमरीकी फारेन मिनिस्ट्री की खुफिया दस्तावेज लीक किए बल्कि
अफगानिस्तान और इराक के अमरीकी फौज की कार्रवाई की कई तस्वीरे भी उतारी
है जिसमें मकामी लोगों की मौत हुई थी। मुश्तबा फौजी को पिछले सात महीनों
से कैद कर रखा गया है और अगले साल उसका कोर्टमार्शल करने की तैयारी चल
रही है। उस फौजी की एक हैकर से हुई बातचीत भी रिकार्ड की गई है।
फिर पकड़ा गया अमर सिंह का झूट
नुमाइंदा खुसूसी
इलाहाबाद! खुद को मुल्क का एक अहम लीडर बताने की फिराक में अपने
सिलसिले में हमेशा झूट बोलते रहने के आदी समाजवादी पार्टी के सदर
मुलायम सिंह यादव के दलाल कहे जाने वाले अमर सिंह ने अलग पूर्वांचल
प्रदेश बनाए जाने के मतालबे के सिलसिले में इलाहाबाद से जो रैली शुरू
की वह शुरू होते ही उनके झूटे प्रोपगण्डे का शिकार हो गई।
इस रैली में भीड़ जुटाने की गरज से अमर सिंह अपने साथ जया प्रदा और संजय
दत्त को लेकर आए थे। उन्होंने कह दिया कि उनके कत्ल की साजिश की जा रही
है इसकी इत्तेला छोटा राजन ने संजय दत्त को फोन करके दी है। उन्होंने
यह भी कहा कि उन्हें मारने के लिए उत्तर प्रदेश के एक बड़े लीडर ने
शार्प शूटर तैयार कराए हैं। उन पर इलाहाबाद और गोरखपुर में हमला करने
की साजिश की गई है। यह सारी बातें छोटा राजन ने संजय दत्त को फोन करके
बताई हैं।
अमर सिंह के इस झूट के फौरन बाद ही संजय दत्त ने मीडिया नुमाइंदों से
मुलाकात की और कहा कि उनको छोटा राजन ने कभी फोन नहीं किया। संजय दत्त
को शायद एहसास हो गया कि अमर सिंह अपने सियासी मफाद में उनका न सिर्फ
इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। अमर
सिंह को अपना बड़ा भाई बताने वाले संजय दत्त को एक ही झटके में एहसास हो
गया कि अपने सियासी मफाद के हल के लिए अमर सिंह किसी का भी इस्तेमाल कर
सकते हैं और किसी भी हद तक जालसाजी करने में उन्हें कोई हिचक नहीं होती
है। इसीलिए संजय दत्त ने कहा कि उन्हें अमर सिंह या किसी और की सियासत
में कोई दिलचस्पी नहीं है। वह तो महज अमर सिंह की दोस्ती में इलाहाबाद
आ गए थे। लेकिन अब कभी भी इस किस्म के जलसे में शरीक नहीं होंगे। संजय
दत्त मुंबई बम ब्लास्ट में सजा याफ्ता है और सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर
रिहा हुए हैं। वह इसलिए भी खौफजदा हो गए कि अगर यह साबित हो गया कि छोटा
राजन जैसे अंडरवर्ल्ड सरगना के साथ उनके ताल्लुकात है और छोटा राजन उनसे
बात करता है तो उनकी जमानत भी मंसूख (रद्द) हो सकती है। वह दुबारा जेल
जा सकते हैं और फिर एक बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं।
संजय दत्त ने अमर सिंह के झूट की पोल पट्टी खोल दी। इसके बावजूद अमर
सिंह को अपने झूट पर कोई शर्म नहीं आई। उन्होंने मीडिया नुमाइंदों से
इंतेहाई ढिढाई के साथ कहा कि छोटा राजन का फोन संजय दत्त के फोन पर नहीं
बल्कि खुद उनके फोन पर आया था चूंकि वह और संजय दत्त दिन भर साथ-साथ थे
इसलिए गलती से उनके मुंह से संजय दत्त का नाम निकल गया। एक प्राइवेट
टीवी चैनल के साथ बात करते हुए अमर सिंह जिस वक्त यह कह रहे थे उस वक्त
उनकी शक्ल देखकर ऐसा महसूस हो रहा था जैसे किसी चोर को पकड़कर लोगों ने
खूब पीटा हो और पुलिस के हवाले कर दिया हो।
अलग पूवार्ंचल रियासत बनाने के लिए पदयात्रा शुरू करने से पहले अमर
सिंह ने एग्लो बंगाली इंटर कालेज मैदान में एक जलसा किया जिसमें तकरीर
करते हुए वह एक बार फिर ऐसा झूट बोल गए जिससे उनके छोटे भाई कहे जाने
वाले संजय दत्त नाराज हो गए। अमर सिह ने बड़े ड्रामाई अंदाज में तकरीर
करते हुुए पूर्वांचल रियासत बनाने के लिए मर मिटने की बात कही। झूटो के
बादशाह का खिताब पा चुके अमर सिंह ने इशारों में यह भी कहा कि उन्हें
कोई सियासी ख्वाहिश नहीं है। यह वही अमर सिंह है जो समाजवादी पार्टी से
किनारे कर दिए जाने के बावजूद इस्तीफा इस लिए नहीं दे रहे थे क्योंकि
इससे उनकी राज्यसभा की मेम्बरी चली जाती। जिसे सियासी ख्वाहिश नहीं होती
है वह किसी भी सियासी पार्टी से निकलने के लिए इस बात का इंतजार नहीं
करता कि उसे जलील करके बाहर किया जाए। लेकिन अमर सिंह ने राज्य सभा की
मेम्बरी बचाने के लिए यह इंतजार भी किया।
अपनी तकरीर में उन्होंने पूर्वांचल के जिलों की बदहाली के लिए मुलायम
सिंह यादव को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही मुलायम सिंह और आजम खां को
मौकापरस्त बताया। जिन अमिताभ बच्चन को ÷बड़े भैया' कहते-कहते अमर सिंह
की जबान तक घिस गई उन्हीं ÷बड़े भैया' की बीवी जया बच्चन ने अमर सिंह से
दामन छुड़ा लिया इस पर भी उन्होंने अपनी तकरीर के दौरान तंज कसे। राहुल
गांद्दी पर निशाना साद्दते हुए उन्होंने कहा कि ÷÷राहुल गांद्दी दलित
कलावती के घर तो हो आए मगर कलावती अब भी भूखी सोती है।' उनकी बात सुनकर
ऐसा लगा कि अमर सिंह कलावती के घर में या फिर पड़ोस में रहते हैं।
उन्हांने कहा कि यूपी और महाराष्ट्र की तरक्की में पूर्वांचल का अहम
रोल है। मगर क्या अहम रोल है इसे बताने से गुरेज किया।
समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद अमर सिंह की हालत ऐसी कटी पतंग
की तरह हो गई है जिसे कोई ÷लूटना' भी पसंद नहीं करता है। अभी तक वह जया
प्रदा और संजय दत्त को दिखाकर थोड़ी बहुत भीड़ इकट्ठा कर लिया करते थे अब
वह उम्मीद भी खत्म हो गई। संजय दत्त ने साफ कह दिया कि वह अमर सिंह के
लोकमंच या किसी और सियासी मंच पर अब नजर नहीं आएंगे। जाहिर है भीड़ भी
नहीं आएगी। जया प्रदा जब हीरोइन थी तब तो उन्हें देखने कोई सिनेमाहाल
तक जाता नहीं था अब ढलते हुए हुस्न का दीदार करने कौन जाएगा। यह तो ÷÷मुन्ना
भाई'' को नाम से मशहूर संजय दत्त का जादू था कि लोग उन्हें देखने के
लिए आते थे। वैसे संजय दत्त का जादू भी अपने मरहूम वाल्दैन सुनील दत्त
और नरगिस दत्त की वजह से था।
कुछ भी हो अमर सिंह ने झूट बोलकर संजय दत्त के लिए तो मुश्किले पैदा ही
कर दी है अब एक बार फिर वह खुफिया पुलिस के ÷रडार' पर आ जाएंगे। संजय
भी इस बात को समझते हैं इसीलिए उन्होंने कहा कि उनके यहां अभी जुड़वा
बच्चे हुए है वह अपनी बीवी-बच्चों और अपनी फिल्मी दुनिया में ही खुश
रहना चाहते हैं इसलिए अब वह किसी भी सियासी मंच पर नजर नहीं आएंगे।
पहेली बनकर रह गया आरूषि तलवार का कत्ल
नुमाइंदा मरकज
नोएडा! नोएडा के आरूषि तलवार कत्ल केस में सीबीआई की नाकामी उसकी
कारकर्दगी को सवालों के घेरे में लाती है। ढाई साल से ज्यादा का अर्सा
गुजर गया मगर सीबीआई अपनी जांच में ढाई कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी। इससे
साफ होता है कि इस एजेंसी में नाकारा और नाअहल (अक्षम) अफसर ही भरे पड़े
हैं। सीबीआई डायरेक्टर बनते ही अश्विनी कुमार ने बड़े-बड़े दावे किए थे
मगर पिछली तीस नवम्बर को वह रिटायर भी हो गए और मुल्जिम के नाम पर एक
चूहे का बच्चा भी नहीं पकड़ सके। अब सीबीआई सबूत न तलाश कर पाने की वजह
से इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगाने की सोंच रही थी। लेकिन बाखबर
जराए के मुताबिक आरूषि कत्ल केस की जांच बंद नहीं होगी जारी रहेगी।
जांच भले ही जारी रहे मगर अब इतना तय है कि आरूषि तलवार के कत्ल की असल
वजह कभी सामने नहीं आ पाएगी और यह कत्ल एक अनसुलझी पहेली बन कर रह जाएगा।
डाक्टर राजेश तलवार की कमसिन बेटी आरूषि तलवार को पन्द्रह मई २००८ को
उसके घर में कत्ल कर दिया था। तफतीश करने गए पुलिस वालों ने मुजरिमाना
लापरवाई से जांच की और न सिर्फ आरूषि के कमरे के फर्श को द्दुलवा दिया
गया बल्कि छत पर जाने वाले जीने की दीवार पर बने खून के निशान नहीं देखे
और न ही सीढियां चढ़ कर छत तक जाने की जहमत की और सारा इल्जाम डाक्टर
तलवार के नौकर हेमराज पर डाल दिया। दो दिन बाद छत से हेमराज की भी लाश
मिल गई तो पुलिस की समझ में नही आया कि क्या करें। नोएडा पुलिस ने ऐसी
लापरवाई किसके इशारे पर बरती यह भी सीबीआई ने मालूम करने की कोशिश नहीं
की और न ही लापरवाई बरतने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई।
पुलिस ने तेइस मई को आरूषि के वालिद डाक्टर तलवार को ही गिरफ्तार कर
लिया था। पहली जून को यह केस सीबीआई ने अपने हाथ में लिया और बाद में
डाक्टर राजेश तलवार को क्लीन चिट दे दी। तब से सीबीआई ही यह केस देख रही
है।
शुरू में सीबीआई ने तेजी तो बहुत दिखाई और आरूषि का मोबाइल फोन बरामद
कर लिया मगर उससे भी वह कोई फायदा नहीं उठा सकी। इसके बाद सीबीआई ने
डाक्टर तलवार के कपाउंडर कृष्णा, उनके दोस्त डाक्टर दुर्रानी के नौकर
राजकुमार और एक शख्स को पकड़ा। मगर तीन महीने के अंदर सीबीआई चार्जशीट
नहीं पेश कर सकी और तीनों को जमानत मिल गई। बाद में कहा गया कि सीबीआई
डायरेक्टर अश्विनी कुमार ने चार्जशीट पेश नहीं होने दी थी क्योंकि ठोस
सुबूत नहीं थे। इस बीच एक बात यह भी सामने आई थी कि जब सीबीआई टीम के
तीन अफसरों ने आरूषि की मां को पूछगछ के लिए बुलाया था तो उसके दो-तीन
दिन बाद ही उन तीन अफसरों को छुट्टी पर भेज कर जांच से अलग कर दिया था
और पुलिस के एक आला अफसर ने बाकायदा मांफी मांगी थी। यह वही पुलिस थी
जिसने आरूषि के बाप को दो हफ्तो से ज्यादा जेल में बंद रखा और मां से
पूछगछ करने के लिए मांफी मांगी इस बात पर भी कभी किसी ने गौर नहीं किया
कि ऐसा क्यों किया गया।
आरूषि मामले में टीवी चैनलों ने भी खूब शोर मचाया था मगर अब किसी को भी
आरूषि की याद नहीं आती। इसके अलावा उसे किरदार के भी बखिए उद्देड़े गए
थे। आरूषि को कत्ल से पहले रेप नहीं किया गया यह तो पोस्टमार्टम
रिपोर्ट से साबित हो गया मगर टीवी चैनलों और पुलिस ने आरूषि के किरदार
का बुरी तरह पोस्टमार्टम किया था। ढाई साल से मामले की जांच पर करोड़ो
रूपए फूंक चुकी सीबीआई ने नवम्बर के महीने में आरूषि के वाल्दैन समेत
कुछ रिश्तेदारों से बातचीत की थी। मगर कुछ हासिल नहीं कर सकी इसीलिए
उसने इस केस को बंद करने का इरादा किया था।
बहरहाल आरूषि के कत्ल का मामला बंद तो नहीं होगा मगर यह भी अब यकीनी
होता जा रहा है कि यह केस हल भी नहीं होगा। निठारी केस में मोनिंदर
सिंह पंद्देर को क्लीन चिट देकर सारा इल्जाम उसके नौकर सुरेन्द्र कोहली
के सर मढने वाली सीबीआई की जांच काबिले एतमाद नहीं रही है। ऐसे कई केस
है जिसकी जड़ तक सीबीआई अभी तक नहीं पहुंची है। आरूषि केस भी उसी केसो
की फेहरिस्त में दर्ज होकर हमेशा के लिए फाइलों में दफन हो जाएगा।
सामने आए स्वामी नित्यानंद की जिन्दगी
के रंगीन पहलू
नुमाइंदा मरकज
बंगलौर। सेक्स स्कैंडल में फंसे स्वामी नित्यानंद के खिलाफ कर्नाटक
पुलिस की सीआईडी की तरफ से तैयार की गई चार्जशीट में स्वामी नित्यानंद
की जिंदगी के कई रंगीन पहलू सामने आए हैं। चार सौ तीस पेज की चार्जशीट
के मुताबिक स्वामी ने एक खातून भक्त को यह कहते हुए सेक्स के लिए राजी
किया था कि वह शिव हैं और खातून पार्वती। स्वामी नित्यानंद ने खातून को
राजी करते हुए यह भी कहा था कि वह एक मजहबी काम कर रहे हैं और इसमें
कुछ भी गैर अखलाकी नहीं है। चार्जशीट में खातून का बयान भी दर्ज है जिस
में कहा गया है कि स्वामी नित्यानंद ने मोक्ष पाने का लालच देकर उससे
जिस्मानी ताल्लुकात बनाए।
वाजेह होकि कुछ महीने पहले दक्खिन भारत के टीवी चैनल सन न्यूज पर एक
खुसूसी टेलीकास्ट में स्वामी का एक तमिल अदाकारा के साथ सेक्स वीडियो
नश्र किया गया था। स्वामी नित्यानंद ने ध्यान लगाकार इलाज करने के
निजाम पर एक तंजीम की भी शुरूआत की थी। इस तंजीम का मरकज बंगलौर में
है। १९७८ को तमिलनाडू में पैदा हुए स्वामी नित्यानंद बचपन से ही योग
तंत्र मंत्र का प्रचार कर रहे हैं। अब उनके सेक्स वीडियो के नश्र होने
से उनके भक्तों में शदीद गुस्सा पाया जा रहा है। इस वीडियो में स्वामी
नित्यानंद अदाकारा के साथ कमरे में हमविस्तर होते दिखाई दे रहे हैं।
बंगलौर के राम नगर में चीफ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में सत्ताइस
नवम्बर को सीआईडी ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। स्वामी नित्यानंद को
कर्नाटक हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी। अदालत में स्वामी
नित्यानंद की दरख्वास्त पर सुनवाई हुई। जिसमें उसने (स्वामी नित्यानंद)
सीआईडी को हाईकोर्ट में चार्जशीट दायर करने से रोकने का मतालबा किया था
लेकिन अदालत ने उस दरख्वास्त को मुस्तरद कर दिया। अदालत ने स्वामी की
चार्जशीट की एक कापी उसे देने वाली दरख्वास्त को भी दरकिनार कर दिया।
स्वामी नित्यानंद ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल करके कहा था
कि सीआईडी पहले ही हाईकोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसलिए उसे
हाईकोर्ट में फिरसे दाखिल करने से रोका जाए। लेकिन कोर्ट ने यह
दरख्वास्त रद्द कर दी। स्वामी नित्यानंद ने खुद को शिव और जिन्सी
ज्यादती की शिकार खातून को पार्वती कहा। चार्जशीट में स्वामी नित्यानंद
की रंगीन जिंदगी के बारे में बताया गया। उसके मुताबिक २००६ में स्वामी
ने अमरीका के लास वेगास शहर के सफर के दौरान कई नाइट क्लब, स्ट्रिप
क्लबों की सैर की थी। इन यात्राओं के दौरान स्वामी जींस वगैरह पहनता था
ताकि उसकी पहचान छुपी रह सके। साथ ही उसे लिप डांस बहुत पसंद था और जब
वह ऐसे क्लब से लौटता था तब अपनी खातून भक्तों से उसी तरह के डांस
करवाता था। स्वामी नित्यानंद पर यह भी इल्जाम है कि खातून भक्तों से न
सिर्फ ऐसे डांस करवाता था बल्कि उनके साथ जबरदस्ती सेक्स भी करता था।
इस मामले में जल्द ही मुकदमा शुरू हो सकता है। डीआईजी चरण रेड्डी ने कहा
है कि सीआईडी हुक्काम ने नित्यानंद उर्फ राजशेखर को अस्मतदरी गैर फितरी
जिंसी ताल्लुकात, द्दोकादेही, मुजरिमाना साजिश रचने जैसे संगीन इल्जाम
लगाए हैं। अप्रैल में पुलिस हुक्काम के हाथ एक सीडी लगी थी जिसमें
स्वामी को जानवरों से बने सामानों का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया था।
उसमें हिरण, तेंदुआ और कुत्ते शामिल थे।
वाई.एस.राजशेखर रेड्डी के वारिस जगमोहन रेड्डी को पार्टी से निकलने पर
मजबूर किया गया
आन्द्द्रा में भी खुद गई कांग्रेस की
सियासी कब्र
हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! कांग्रेस आलाकमान के करीबी मुशीरों (सलाहकारों) ने
आन्द्द्रा के साबिक हरदिल अजीज वजीर-ए-आला वाई.एस.आर.राजशेखर रेड्डी के
लोकसभा मेम्बर बेटे जगमोहन को वालिदा विजय लक्ष्मी (विजयम्मा) के साथ
कांग्रेस छोड़ने पर मजबूर करके तामिलनाडु और कर्नाटक की तरह आन्द्द्रा
प्रदेश में भी कांग्रेस पार्टी की सियासी कब्र खोद दी। सभी जानते हैं
कि राजशेखर रेड्डी ने अपनी तकरीबन सवा पांच साल की हुकूमत के दौरान
गरीबों और आम लोगों के लिए जो बेशुमार काम किए थे उन कामों की वजह से
वह आन्द्द्रा प्रदेश के एक-एक शख्स के दिलो-दिमाग पर छा गए थे। एक
हेलीकाप्टर हादसे में राजशेखर रेड्डी की बेवक्त मौत के बाद आन्द्द्रा
के आम लोग जगन मोहन को ही उनका वारिस और उनके मुतबादिल (विकल्प) की
शक्ल में देख रहे थे। लेकिन कांग्रेस आला कमान के नजदीकियों ने चंद
महीनों के अंदर ही जगन को पार्टी कयादत के लिए खतरा बताकर उन्हें पार्टी
से निकलने पर मजबूर कर दिया।
जगन की शुरूआती गलती यह थी कि उन्होंने अपने वालिद के इंतकाल के बाद
उनके लिए जान देने वाले लोगों के वारिसैन के पास जाकर उन्हें खिराजे
अकीदत पेश करने का एलान कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उनके वालिद के
इंतकाल के गम में जितने भी लोगों ने अपनी जानें दी वह एक यात्रा की
शक्ल में उन सबके घरों को जाएंगे और उनसे हमदर्दी का इजहार करेंगे। इस
यात्रा का नाम उन्होंने ओडारपुर यात्रा रखा था। यही से दिल्ली में बैठे
उनके कुछ मुखालिफीन की भवें तन गईं। इन लोगों को ऐसा लगा कि अगर जगन ने
यह यात्रा कर ली तो वह भी अपने वालिद की तरह आन्द्द्रा प्रदेश में एक
मजबूत लीडर बन जाएंगे। इसलिए उन्हें ऐसी किसी यात्रा की इजाजत नहीं दी
जानी चाहिए। उन्हें यात्रा शुरू करने से रोका गया तो वह अपनी वालिदा को
साथ लेकर कांग्रेस सदर सोनिया गांद्दी से मिलने पहुंचे। जगन के मुताबिक
उनकी वालिदा ने सोनिया गांद्दी से रो-रोकर इस यात्रा की इजाजत मांगी
लेकिन सोनिया को इतना भड़काया जा चुका था कि विजयम्मा के आसुंओ का उन पर
कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने जगन को यात्रा की इजाजत नहीं दी। अब जगन
ठहरे राजशेखर रेड्डी के बेटे अपने बाप की ही तरह उन्होंने कहा कि वह जो
फैसला कर चुके है उससे पीछे हटने की गुंजाइश नहीं है। क्योंकि उनके
वालिद के सैकड़ो चाहने वालों ने अपनी जान की कुर्बानी दी है और कुर्बानी
देने वालों के पास जाकर उनके दर्द में शामिल होना इंतेहाई जरूरी काम
है। उन्होंने यात्रा शुरू कर दी, खुद सोनिया गांद्दी तो खामोश रहीं
लेकिन पार्टी के दूसरे लीडरों ने उन्हें बार-बार द्दमका कर यात्रा रोकने
की कोशिश की। जगन फिर भी नहीं माने तो इनडायरेक
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