दलित की बेटी ने
अपने लिए दो सौ करोड़ का बंगला बनवाया
हिसाम सिद्दीकी
लखनऊ! चीफ मिनिस्ट्री के बजाए पांच साल तक बादशाहत करके उत्तर
प्रदेश की हुुकूमत से हटने वाली दलित की बेटी मायावती ने साबिक चीफ
मिनिस्टर की हैसियत से रहने के लिए दो लाख बीस हजार स्क्वायर फिट
में अपने लिए जो कोठी बनवाई उसकी जमीन की कीमत ही तकरीबन सवा सौ
करोड़ रूपए है। इसकी तामीर पर भी सौ करोड़ से ज्यादा रूपया खर्च
किया गया। अखिलेश यादव हुकूमत ने यह देखकर एतराज किया तो मायावती
की पार्टी के रियासती सदर और असम्बली में लीडर आफ अपोजीशन स्वामी
प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह बात तो मकान बनाने वाली एजेंसी राजकीय
निर्माण निगम से पूछी जानी चाहिए कि उसने एक ही मकान पर इतना पैसा
क्यों खर्च कर दिया। लखनऊ के सबसे कीमती इलाके में मायावती का जो
यह बंगला बना है वह किसी बादशाह के किले से कम नहीं है। उन्होंने
अपने लिए सत्तर इंच का जो सोनी एलसीडी टीवी लगाया है उसकी ही कीमत
लाखों में है। इसके अलावा उनके महल में पचास इंच के एक एलईडी टीवी
समेत मुख्तलिफ दीवारों में दर्जनों टीवी लटके हुए हैं। एनडीटीवी
इंडिया के कमाल खान ने काफी मेहनत करके जो रिपोर्ट अपने चैनल के
लिए तैयार की उसे देखने और सुनने के बाद हर शख्स इसी नतीजे पर
पहुंचा कि शायद मायावती का ताल्लुक किसी गरीब दलित घर से होेने के
बजाए किसी राजा महाराजा के खानदान से है।
मायावती जून 1995 में बीजेपी की मदद से पहली बार जब महज चार महीनों
के लिए उत्तर प्रदेश की वजीर-ए-आला बनी थीं उसी वक्त उन्होंने माल
एवेन्यू में तेरह नम्बर की कोठी अपने नाम एलाट कर ली थी। दूसरी बार
चीफ मिनिस्टर बनी तो इसके पीछे की एक कोठी जिसमें वजीर की हैसियत
से किसी जमाने में बेनी प्रसाद वर्मा रहा करते थे उसे मायावती ने
खाली कराया और तुड़वाकर अपने बंगले में शामिल कर लिया। तीसरी बार
जब वह चीफ मिनिस्टर बनी तो उन्होंने तेरह नम्बर के बराबर की एक बड़ी
कोठी में चल रहे गन्ना कमिश्नर के दफ्तर को खाली कराया और उसे अपनी
कोठी में मिला लिया। उसके पीछे एक छोटी कोठी थी, वह भी तेरह नम्बर
में शामिल हो गई। इस तरह मायावती की कोठी का साइज अब तक दो लाख बीस
हजार स्क्वायर फिट हो चुका है।
एक छोटे से मकान में अपने आधा दर्जन से ज्यादा भाई बहनों के
दरमियान पली-बढ़ी मामूली दलित प्रभुदयाल की बेटी मायावती
हिन्दुस्तान के मजबूत जम्हूरी सिस्टम के तहत उत्तर प्रदेश की
वजीर-ए-आला बनी तो उन्होंने सबसे पहला काम जम्हूरी कद्रों (लोकतांत्रिक
मूल्यों) को ठुकराकर बादशाहत करने का फैसला किया और अपने लिए जिस
किस्म का मकान तैयार कराया वैसे मकानों में तो शायद बादशाह भी नहीं
रहा करते थे। उन्होंने अपने सोने के लिए जो बेडरूम बनवाया वह तीस
फुट लम्बा और तीस फुट चैड़ा है। उसके साथ तीस फुट लम्बा और पन्द्रह
फुट चैड़ा डेेसिंग रूम है। मायावती ने अपने गुस्ल के लिए जो
बाथरूम बनवाया है उसकी लम्बाई अट्ठारह फुट और चैड़ाई अट्ठारह फुट
है। बेडरूम के साथ एक सिटिंग रूम है जिसकी लम्बाई तीस फुट और
चैड़ाई बीस फुट है। उनके बेडरूम में तीस फुट की वार्डरोब है। इस
महल में एक स्वीमिंग पूल भी है।
माल एवेन्यू के दो लाख बीस हजार स्क्वायर फुट जमीन पर बने माया महल
के चारो तरफ तकरीबन तीस फुट ऊंची पत्थर की बाउंड्री बनाई गई है,
ताकि परिंदे भी अंदर झांक ना सके। माया महल के मेन ब्लाक में तेरह
कमरे हैं जिनमें तीन गेस्ट रूम, तीन सिटिंग रूम, स्टाफ आफिस के लिए
तीन कमरे, एक बड़ा जदीद तरीन (आत्याआधुनिक) माड्यूलर किचन और दो
बेडरूम बने हैं। इस महल में बने कमरों की दीवारें सेंथेटिक
मार्बल्स से बनाई गई है। जिन पर महंगे दर्जनो एलईडी टीवी टांगे गए
हैं। इस महल को बनाने में कितना पैसा खर्च हुआ, इसका अंदाजा इसी से
लगाया जा सकता है कि तेरह मई 2007 को मायावती ने चीफ मिनिस्टर की
हैसियत से हलफ लिया था उसके तीसरे दिन से ही माया महल का काम शुरू
हो गया था पांच साल बाद मार्च 2012 में उनकी सरकार गई उस वक्त तक
मुसलसल काम चल ही रहा था। मायावती के इस महल में एक-एक करोड़ के दो
गेट लगाए गए हैं, जिनको खोलने बंद करने केलिए आटोमेटिक सिस्टम लगा
है। अंदर जाने के रास्ते में जमीन के अंदर कार स्कैनर और फ्लोर
माउटेंड कैमरों के अलावा बड़ी तादाद में सीसीटीवी कैमरे भी लगे
हैं। महल के एक हिस्से में बेसमेंट भी है जिसमें तकरीबन दो दर्जन
लक्जरी कारें खड़ी की जा सकती हैं। कारो की मरम्मत के लिए दो कार
सर्विस सेंटर बने हैं और ड्राइवरों के लिए दो बड़े एयरकंडीशन रूम।
माया महल में पत्थर के हाथियों के अलावा खुद मायावती और उन्हें
प्रदेश की महारानी बनाने वाले कांशीराम की बड़ी-बड़ी मूर्तियां भी
लगी हैं। उम्दा किस्म के फव्वारों से अक्सर पानी भी बरसता रहता है।
लेकिन इस पूरे महल में हरियाली नहीं है। क्योंकि लाॅन में घास और
हरे दरख्त नहीं लगाए गए हैं हर तरफ महंगे ग्रेनाइट का ही फर्श बना
है।
मायावती ने सिर्फ माल एवेन्यू में ही माया महल नहीं बनाया है
उन्होंने लखनऊ के कैण्ट में भी एक बड़ी कोठी खड़ी की है। इसके अलावा
दिल्ली में भी कई कोठियां नए सिरे से बनवाई हैं। खुद इन्होंने एक
बार अपने समाज के लिए तकरीर करते हुए कहा था कि आप लोगों ने मुझे
तोहफे में जो कई करोड़ रूपया दिया, आपको यह जान कर खुशी होगी कि
मैंने उन रूपयों से लखनऊ और दिल्ली में कई पुराने बने बनाए बंगले
खरीद लिए हैं। ‘‘माले मुफ्त दिल बेरहम’’ की तर्ज पर मायावती ने भी
सरकारी खजाना लुटा कर अपने लिए मकान और महल बनवाना शुरू किए तो इन
महलों का प्लान पहले से तय नहीं किया गया, बलिक कमरे और फर्श जब
बनकर तैयार हो जाते थे तब मायावती उनका मुआयना करती थी और अक्सर
महंगा बना कमरा तोड़ ही दिया जाता था। उनके महल में ऊंची कीमत पर
बने कई हिस्सों को तो बीस से पच्चीस बार तोड़ा और बनाया गया। वह
खुद को बुद्धिष्ट यानि बौद्ध मजहब में यकीन करने वाली खातून बताती
हैं। जिस मजहब के बानी महात्मा बुद्ध थे। वह बहुत बड़े महाराजा हुआ
करते थे लेकिन मजहबी ज्ञान आने के बाद उन्होंने आधी रात में अपना
राजपाट और महल सब कुछ छोड़ दिया था। उन्हीं भगवान बुद्ध के ईजाद
किए हुए मजहब में यकीन करने वाली मायावती ने अपने लिए दो सौ करोड़
से ज्यादा का बंगला बनाया जिसमें उन्हें कभी कभार ही आराम फरमाना
है।
महंगाई की मार में होगा और इजाफा
मरियम सिद्दीकी
नई दिल्ली! हिन्दुस्तान में महंगाई की मार में तेजी से इजाफा
होेने का खतरा पैदा हो गया। इस बार की महंगाई कुदरती नहीं बल्कि एक
सोंची समझी साजिश का नतीजा होगी। साजिश का अंदाजा इसी बात से लगाया
जा सकता है कि अमरीका की वजीर खारजा हिलेरी क्लिंटन के हिन्दुस्तान
दौरे से वापस जाते ही रूपए के मुकाबले डालर की कीमतों में अचानक
उछाल आ गया। यह साजिश ही है कि जब दुनिया के बेश्तर (अधिकांश)
मुल्को में डालर की कीमतों में कमी आ रही है। सऊदी अरब और यूनाइटेड
अरब अमीरात में डालर की कीमतें फिक्स्ड हैं उसी दौरान हिन्दुस्तान
में डालर की कीमतों में इजाफा होता जा रहा है। खबर लिखे जाने तक एक
डालर की कीमत तकरीबन पचपन रूपए तक पहुंच चुकी थी।
डालर की कीमत में इजाफे की अजीब व गरीब दलील भी दी जा रही है। कहा
जा रहा है कि योरपियन मुल्कों की मुश्तरका करेंसी ‘यूरो’ की हालत
खराब होने और यूनान की मआशी हालत खस्ता होने के बाद उसके ‘‘योरोजोन’’
से अलग होने की खबरों ने हिन्दुस्तान में डालर की कीमतों में इजाफा
कर दिया है। अगर यह दलील ठीक होती तो योरपियन मुल्कों में भी डालर
की कीमतों में इजाफा होना चाहिए था। वहां तो डालर की कीमतों में
कोई इजाफा हो नहीं रहा है। वहां तो ‘यूरो’ के साथ डालर की भी हालत
खस्ता है।
दरअस्ल अमरीका सालों से हिन्दुस्तान पर दबाव डाल रहा है कि
हिन्दुस्तान कच्चे तेल का इम्पोर्ट ईरान से न करके अमरीका के बताए
हुए किसी अरब मुल्क से करे। ऐसा न करने पर हिन्दुस्तान के खिलाफ कई
तरह की पाबंदियां लगाने की भी धमकियां अमरीका दे चुका है। चूंकि
ईरानी तेल निसबतन सस्ता है और कई महीनों की उधारी पर मिल जाता है,
इसीलिए हिन्दुस्तान ईरान से तेल इम्पोर्ट करने का सिलसिला खत्म नहीं
करना चाहता। इस वक्त हिन्दुस्तान अपनी जरूरत का एक चैथाई से भी
ज्यादा कच्चा तेल ईरान से इम्पोर्ट कर रहा है। अमरीका किसी भी हालत
में इस इम्पोर्ट को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। हिलेरी क्लिंटन ने
हिन्दुस्तान का जो हालिया दौरा किया उसमें भी उन्होंने इसीबात पर
ज्यादा जोर दिया कि किसी भी तरह हिन्दुस्तान ईरान से कच्चा तेल
इम्पोर्ट करना बंद कर दे। हिन्दुस्तान इसके लिए तैयार नहीं हुआ तो
उनके वापस जाते ही रूपए के मुकाबले डालर की कीमतों में अचानक उछाल
आ गया। डालर की कीमतों में इजाफे से सबसे खराब असर कच्चे तेल की
कीमतों पर पड़ता है। दुनिया जानती है कि पेट्रोलियम अशया (पदार्थों)
की कीमतों में इजाफे का असर हिन्दुस्तान की हर चीज पर पड़ता है।
खाने का तेल भी बहुत बड़ी मिकदर (मात्रा) में इम्पोर्ट होता है उसकी
कीमतों मंे इजाफा होता है तो उसका भी असर तेल, साबुन सभी चीजों पर
पड़ता है। इंतेहा यह कि सब्जियों तक की कीमतों पर इसका उल्टा असर
पड़ता है। इस वक्त हिन्दुस्तान पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के अलावा
दवाएं, मशीनरी, एलेक्ट्रानिक कम्पोनेेन्ट्स, साफ्टवेयर,
इंडस्ट्रियल केमिकल्स, सोना, चांदी, कास्मेटिक प्रोडक्ट्स,
फर्टीलाइजर और जिंदगी बचाने के लिए जरूरी दवाएं विदेशों से
इम्पोर्ट करता है। डालर महंगा होने से सीधा असर इन तमाम चीजों पर
पड़ रहा है। अमरीका शायद यही चाहता है कि हिन्दुस्तान में महंगाई
में इस हद तक इजाफा करा दिया जाए कि अवाम में सरकार के खिलाफ बगावत
जैसी सूरतेहाल पैदा हो जाए। इसी दबाव में हिन्दुस्तान अमरीका की
मर्जी के मुताबिक ईरान से अपने सभी तिजारती ताल्लुकात खत्म कर ले।
गुजिश्ता दस महीनों में रूपए के मुकाबले डालर की कीमतों में चैबीस
फीसद तकरीबन एक चैथाई तो सिर्फ तीन महीनों में रूपए के मुकाबले
डालर की कीमतों में दस फीसद तक का इजाफा हुआ है। खबर लिखे जाने के
महज एक रोज कब्ल डालर की कीमत में इकहत्तर (71) पैसों का इजाफा हुआ
था। किसी भी करेंसी की कीमत में इतनी तेजी से इजाफा बगैर किसी
इंटरनेशनल साजिश के हो ही नहीं सकता। इस साजिश में वह ताकतें भी
शामिल हो सकती है जो मारीशस, दुबई, सिंगापुर और आस्ट्रेलिया रूट से
विदेशों में जमा कालाधन वापस हिन्दुस्तान लाकर यहां रियल स्टेट
इंटरटेनमंेट इंडस्ट्री और आईपीएल के जरिए काले धन को सफेद बनाने का
काम कर रही हैं। विदेशी सरमायाकार (निवेशक) इस वक्त हिन्दुस्तान
में पैसा लगाने के बजाए उल्टे शेयर मार्केट में लगा पैसा वापस
निकालने का काम कर रहे हैं। यह सब बिलावजह नहीं हो रहा है।
फाइनेंस मिनिस्टर प्रणव मुखर्जी ने देश की पार्लियामेंट में इतना
कह कर अपनी जिम्मेदारी से दामन बचाने की कोशिश की है कि ‘यूरो’ का
मार्केट ठीक होते ही हिन्दुस्तान में डालर की कीमतें भी काबू में आ
जाएंगी। यूरो कब ठीक होगा यह तो कोई नहीं जानता अगर प्रणव मुखर्जी
की बात सही तस्लीम कर ली जाए तो जब तक डालर की कीमतें काबू में
आएंगी उस वक्त तक मुल्क में महंगाई में इतना ज्यादा इजाफा हो चुका
होगा कि आम आदमी का जिंदा रहना मुश्किल हो जाएगा। प्रणव मुखर्जी भी
अच्छी तरह जानते हैं कि मुल्क में एक बार कीमतों में जो इजाफा हो
जाता है वह फिर कभी कम नहीं होता इस लिए पूरे मुल्क को महंगाई के
एक खतरनाक तूफान का मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए।