लादेन से अब
भी खौफजदा अमरीकी
काबुल! अमरीकी सदर बराक ओबामा ने दो
मई को ओसामा बिन लादेन की पहली बरसी पर अफगानिस्तान के बगराम
में वाके एयर बेस पर पहुंचकर अपने फौजियों के हौसले बढ़ाने की
जो कोशिश की वह इसी तरफ इशारा करती है कि अमरीका ओसामा बिन
लादेन की खौफनाक शबीह(छवि) को लोगों के जेहनों में बरकरार रखते
हुए अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी का जवाज चाहता है। अमरीकी
डिफेंस मिनिस्टर लेवेन पेनेटा ने इसी को आगे बढ़ाते हुए कहा कि
अलकायदा कमजोर तो हुआ है लेकिन खत्म नहीं हुआ है। बराक ओबामा
का अफगानिस्तान दौरा अगरचे खुफिया रखा गया लेकिन जिस मौके पर
किया गया और राजधानी काबुल से बगराम एयरबेस तक जिस बड़े पैमाने
पर हिफाजती इंतजामात किए गए थे उनसे यही पता चलता है कि अलकायदा
का सरगना तो मारा जा चुका है लेकिन उसका खौफ अभी तक अमरीकियों
के दिलों में बहुत गहरे तक बैठा हुआ है। अमरीकी सदर ने अपने
फौजियों का हौसला बढ़ाते हुए उनके सामने जो तकरीर की उसका लब ओ
लुआब यही था कि पिछले दस बरसों से आप बड़ी बहादुरी से दहशतगर्दों
के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। इसका खात्मा बहुत जल्द है लेकिन
अभी जितने दिनों तक उन्हें अफगानिस्तान में रहना है वह सख्त
अजमाइश के दिन होंगे। उन्होंने कहा कि एक दहाई से ज्यादा अर्सा
जंग के काले साए में गुजारा है। अब हम अफगानिस्तान में उजाला
होने से ठीक पहले के अंधेरे दौर में खड़े हैं और यहां से हमें
एक नए दिन की रौशनी नजर आ रही है।
ओसामा बिन लादेन की पहली बरसी आने के पहले
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में जबरदस्त खदशात जाहिर किए जा रहे
थे कि जैसे अलकायदा दहशतगर्द अपने लीडर को खिराजे अकीदत पेश
करने के लिए खून की होली खेलेंगे। पाकिस्तान में तशद्दुद के
इक्का दुक्का वाक्यात पेश आए। लेकिन उनकी नौइयत मामूल के
वाक्यात से ज्यादा कुछ नहीं थी। अगरचे बराक ओबामा के
अफगानिस्तान छोड़ने के महज डेढ़ घंटे के बाद राजधानी काबुल दहल
उठी और कई जगह बम धमाके हुए। पहला खुदकुश कार बम हमला प्राइवेट
सिक्योरिटी गार्डों के निगरानी वाले एक रिहाइशी कम्पाउंड में
हुआ जो जलालाबाद रोड पर वाके हैं। इस हमले में चार लोग मारे गए
जबकि सत्रह से ज्यादा जख्मी हुए। कहा गया है कि इस हमले में
तीन तालिबान शामिल थे। इन हमलों के बाद तालिबान ने एलान किया
कि ‘‘ मौसम बहारा’’ में यह हमलों की सालाना शुरूआत है। हर साल
इस मौसम में जब बर्फ पिघलती है और उस वक्त आमद व रफ्त के साथ
लड़ना आसान हो जाता है ऐसे मौसम में तालिबान अपनी खोई हुई ताकत
और इलाके दोबारा हासिल करना चाहते है।